गंगा नदी की सफाई में इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) के अभियान के साथ ही अब सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) भी उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र और गंगा नदी को निर्मल बनाने के काम में जुट गई है।

बीएसएफ ने सोमवार 12 अक्टूबर को डेढ़ महीने तक चलने वाले इस अभियान का शुभारंभ किया, जिसमें यह अर्द्ध सैनिक बल 1500 किलोमीटर की दूरी पैदल, साइकिल, नाव और अन्य पर्यावरण अनुकूल संसाधनों से पूरा करेगा और विभिन्न राज्यों से गुजरता हुआ हिमालय के विभिन्न ग्लेशियरों पर पहुंचेगा।

हिमालयी क्षेत्र में वहां की स्वच्छता को समर्पित इस विशेष अभियान- ‘स्वच्छ भारत: स्वच्छ हिमालय’ के तहत आम जनता और अन्य संबंधित लोगों में अपनी और आसपास के इलाकों की रोजमर्रा की साफ-सफाई के प्रति जागरुकता पैदा करना और हिमालय के ग्लेशियरों व गंगा नदी सहित हिमालय की घाटियों और पर्यावरण के तमाम पहलुओं के प्रति चेतना पैदा करना है।

चार चरणों में होने वाली इस यात्रा के अभियान दल में बीएसएफ इंस्‍टीट्यूट ऑफ एडवेंचर एंड एडवांस ट्रेनिंग-देहरादून के 10 अधिकारी और 50 अधीनस्थ अधिकारी और कर्मी शामिल हैं। इस अभियान में लोगों को पर्यावरण संतुलन बिगाड़े बिना कचरे के निपटान की आदत को बढ़ावा देने, गंगा को प्रदूषित होने से बचाने के लिए जागरुक बनाना और उसे पवित्र रखने के लिए कचरा विहीन रखने की प्रेरणा देना और ईंधन बचाकर पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जागरुक करना भी शामिल है। यह अभियान बीएसएफ स्थापना दिवस 1 दिसंबर को नई दिल्ली में संपन्न होगा।

शुक्रवार को इस अभियान दल को केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजीजू ने रवाना किया। इस मौके पर बीएसएफ के महानिदेशक देवेन्द्र कुमार पाठक और बल के आईजी आदित्य मिश्रा और वीएन पराशर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

बीएसएफ की स्थापना 1965 में सीमा की सुरक्षा के लिए की गई थी और यह बल अभी भारत-पाक और भारत-बांग्लादेश की सीमाओं की रक्षा में मुस्तैद है।