पत्तों, पुआल, भूसी और सूखे कचरे से ईंधन बनाएगी ये मशीन

ईंधन के तौर पर कोयला न केवल प्रदूषण बढ़ाता है बल्कि इसके साथ एक सत्य ये भी है कि एक दिन यह खत्म हो जाएगा। इसी को देखते हुए भारतीय वन सेवा के अधिकारी कपिल जोशी ने एक ऐसी ब्रिकेटिंग मशीन तैयार की है, जो पत्तों, पुआल, भूसी और सूखे कचरे के वेस्ट से ईंधन बनाती है। यह कोयले का प्रदूषण रहित विकल्प है, जो फैक्ट्रियों और भट्टियों में भी काम आ सकता है।

कपिल जोशी की यह मशीन केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय ने उन्नत भारत अभियान के लिए स्वीकृत भी कर ली है। संयुक्त राष्ट्र में नरेंद्र मोदी के कार्बन उत्सर्जन व जीवाश्म ईंधन का खर्च कम करने के संकल्प के तहत मंत्रालय ने इसमें खासी रुचि भी दिखाई है।

कपिल जोशी ने यह मशीन आईआईटी रुड़की प्रयोगशाला में तैयार की, जिसके लिए उन्हें आईआईटी ने पीएचडी भी अवॉर्ड की। जोशी के मुताबिक, मशीन में धान की भूसी, पत्ते और सूखे कचरे के अलावा चीड़ के पत्ते भी इस्तेमाल हो सकते हैं।

इस तरह काम करती है ये मशीन
फिलहाल बिजली से चलने वाली ब्रिकेटिंग मशीन राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में शीरे व गोबर से ईंधन का विकल्प तैयार कर रही हैं। लेकिन बिजली की कमी के कारण करोड़ों के प्रोजेक्ट बंद पड़े हैं। इन मशीनों में पत्तों को जलाकर राख बनाया जाता है, जिनसे कार्बन डाई आक्साइड निकलती है, जबकि जोशी की इस अनूठी मशीन में पत्ते और सूखा कचरा डालकर उन्हें आंच पर गर्म किया जाता है।

गर्मी पाकर पत्तों की कोशिकाएं लिगनिन नामक तत्व छोड़ती हैं, उसी वक्त इन्हें कसकर दबा देते हैं। कंप्रेस करते ही ये चौकोर और लंबी ईंटों की शक्ल में आ जाती हैं। इस मशीन का वजन भी काफी हल्का होता है और बनाने का खर्च मात्र 15 से 20 हजार रुपये आता है।