अगर आप दून में प्लॉट खरीद रहे हैं तो एमडीडीए से कुछ बातों की जानकारी जरूर ले लें, वरना भारी परेशानियों का समना करना पड़ सकता है। अस्थायी राजधानी देहरादून में बिना जानकारी के प्लॉट खरीदने वाले सैकड़ों लोग इन दिनों एमडीडीए के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

जमीन बेचने वाला प्रॉपर्टी डीलर या कॉलोनाइजर लोगों को अंधेरे में रखकर जमीन बेच देता है। इसके बाद परेशान लोगों को नक्शा पास करवाने, जमीन का लैंड यूज चेंज कराने और अन्य औपचारिकताओं के लिए एमडीडीए के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

एमडीडीए में बड़ी संख्या में ऐसे मामले पहुंच रहे हैं। ज्यादातर मामले नया मास्टर प्लान लागू होने से पहले खरीदी गई जमीनों के हैं। नए मास्टर प्लान के अनुसार जमीनों का लैंड यूज, सड़क व अन्य मानकों में खासा बदलाव हो चुका है। ऐसे में जिन लोगों ने पहले जमीन खरीदी अब जब वह नक्शा पास करवाने पहुंच रहे हैं, तो उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है।

प्लॉट खरीद रहे हैं तो पहले इन बातों का रखें ख्याल

  • जमीन का लैंड यूज अनिवार्य रूप से जांचें।
  • जमीन के स्वामित्व की जांच करें।
  • कॉलोनी एमडीडीए से अप्रूव्ड है या नहीं यह देखें।
  • जिस उपयोग के लिए जमीन ले रहे हैं, उसकी जांच जरूर करें।
  • मास्टर प्लान में निर्मित क्षेत्र की जानकारी भी लें।

महंगा पड़ेगा सब डिविजन चार्ज
अनाधिकृत कॉलोनी में मकान खरीदने पर सब डिविजन चार्ज के रूप में सर्किल रेट का पांच फीसदी भुगतान करना होता है। ज्यादातर खरीदार दाम कम होने के लालच में ऐसी कॉलोनी में मकान खरीद लेते हैं। बाद में उन्हें इसका पूरा भुगतान करना पड़ता है। ऐसी कॉलोनी में 100 मीटर की परिधि में 50 से 60 फीसदी मकान बनने के बाद ही नक्शे पास होते हैं। इसमें सामान्य तौर पर 8 से 10 साल का वक्त लग जाता है।