धारचूला।… चीन लगातार तिब्बत क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछा रहा है, दूसरी ओर बेहद अहम सीमावर्ती क्षेत्र में भारत की तरफ कछुआ चाल से सड़क बन रही है। चीन ने पिथौरागढ़ जिले की सीमा से लगे तिब्बती भू-भाग पर लिम्टियाधूरा तक दूसरी सड़क बनाकर तैयार कर ली है, जबकि अंतिम भारतीय गांव कुटी से 29 किमी दूर स्थित लिम्टियाधूरा क्षेत्र में भारतीय सीमा पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम तक नहीं हैं।

तिब्बत में चीन पहले ही लिपूपास तक सड़क निर्माण कर चुका था। इधर अब लिम्टियाधूरा तक भी सड़क निर्माण हो चुका है। आज से करीब डेढ़ साल पहले लिम्टियाधूरा तक चीनी सैनिक घोड़े और खच्चरों से सीमा पर रेकी करते थे। इधर, कुछ दिनों से यहां पर वाहनों से रेकी हो रही है।

यहां तक कि सड़क निर्माण में चार जेसीबी जुटी हैं। ग्रामीणों के अनुसार इस बार लिम्टियाधूरा में सड़क नजर आ रही है। चीन सीमा पर लिपूपास के अलावा लिम्टियाधूरा तक दूसरी सड़क बनने से सीमा पर रहने वाले ग्रामीण हैरान हैं। इधर भारत में अभी तक चीन सीमा तक बन रही सड़क मुहाने में गर्बाधार से 10 साल में सिर्फ पांच किमी तक ही बन पाई है।

गर्बाधार से बूंदी तक 27 किमी सड़क निर्माण चुनौती बनी हुई है। अलबत्ता उच्च हिमालयी भू-भाग में गर्ब्याग से कालापानी तक लगभग 20 किमी सड़क तैयार हुई है। गर्बाधार से बूंदी तक सड़क नहीं होने से इसका कोई औचित्य नहीं रह गया है।

कहां है ये लिम्टियाधूरा
तहसील के व्यास घाटी में 12,300 फुट की ऊंचाई पर स्थित अंतिम भारतीय गांव कुटी से लिम्टियाधूरा की दूरी 29 किमी है। सीमा पर यह लिपूलेख के समानांतर है। लिपूलेख पूर्व में तथा लिम्टियाधूरा पश्चिम में है। दोनों के बीच स्पान यानी हवाई दूरी मात्र दो किमी और धरातलीय दूरी लगभग 15 किमी है।

लिपूलेख और लिम्टियाधूरा की ऊंचाई भी समान है। कुटी से जौलिंगकोंग 19 किमी, जौलिंगकोंग से सात किमी दूर बिलज्या और बिलज्या से लिम्टियाधूरा की दूरी तीन किमी है। भारत-चीन युद्ध 1962 से पूर्व इस दर्रे से भारत-तिब्बत व्यापार होता था। जौलिंगकोंग से कुटी के बीच निखुर्च मंडी थी, जिसके अब मात्र अवशेष भर शेष बचे हैं।