नेपाल भूकंप की फाइल फोटो

सालों से सुसुप्ता अवस्था में पड़ीं हिमालयी क्षेत्र की ‘भूकंपीय पट्टियां’ नेपाल में भूकंप आने के बाद एक बार फिर सक्रिय हो गई हैं। नेपाल के भूकंप ने इन पट्टियों के ‘ट्रिगर फैक्टर’ का काम कर दिया है। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान में आयोजित हिमालय-कराकोरम-तिब्बत कार्यशाला के तीसरे दिन विज्ञानियों ने बताया कि इन पट्टियों के सक्रिय होने के बाद यहां भूकंप आने की आशंका बढ़ गई है।

साथ ही नेपाल में अभी भूकंप आने की आशंका है। नेपाल में 15 अप्रैल 2015 के भूकंप में भूगर्भ की पूरी ऊर्जा नहीं निकल पाई। यह ऊर्जा दक्षिण नेपाल के तलहटी वाले भूगर्भ में बड़ी मात्रा में इकट्ठी है। कार्यशाला में भूकंप विषय पर आयोजित विशेष सत्र में विज्ञानिकों ने अपने शोध पत्रों को स्लाइड के माध्यम से प्रस्तुत किया।

इसमें बताया गया कि दक्षिणी नेपाल तराई इलाका है। यहां आबादी ज्यादा है। नेपाल सरकार को विज्ञानिकों ने सलाह दी कि पहले से ही वहां बचाव के संसाधन एकत्र कर लिए जाएं। साथ ही हर वक्त अलर्ट रहें।

विज्ञानिकों ने यह भी बताया कि भूकंप आने के पहले बड़ी मात्रा में राडान गैस भूगर्भ से बाहर निकलती है। इससे भूकंप का अंदाजा थोड़ा पहले लगाया जा सकता है। भूगर्भ विज्ञानी डॉ. वीसी ठाकुर ने बताया कि भूकंप संवेदी क्षेत्र नेपाल से बिहार तक फैला हुआ है।

यहां पहले भी भूकंप आए हैं और आगे भी आशंका है। इसके अलावा अन्य विज्ञानियों ने हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय हुईं भूकंपीय पट्टियों के संबंध में सतर्क रहने का सुझाव दिया। कार्यशाला में योगेन काई, विनीत के गहलौत, टीना एम नीमी, मोना लिसा, सप्तऋषि डे, साइमन क्लेमरर, सोमा नाथ सप्तकोटा, देव जीत हजारिका आदि ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।