सात जोशीली महिलाओं ने माणा दर्रे पर सफलतापूर्वक पूरा किया बाइकिंग अभियान

सात महिलाओं ने जबरदस्त कामयाबी हासिल करते हुए उत्तराखंड में भारत-चीन सीमा पर समुद्रतल से 18399 फीट की ऊंचाई पर स्थित मोटरमार्ग से जुडे सर्वाधिक ऊंचे माणा दर्रे तक सफल मोटरसाइकिल अभियान पूरा कर लिया है।

जर्मन फर्म द्रिवोल द्वारा प्रायोजित ‘बीइंग अ वूमन’ नाम से चलाए गए इस अभियान में 38 से 54 साल की उम्र की महिलाओं ने गत 27 सितंबर को देहरादून से अपना सफर शुरू किया था, जो 1200 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद मंगलवार रात संपन्न हुआ।

अलग-अलग पृष्ठभूमि से जुड़ी, लेकिन मोटरसाइकिल के प्रति जुनून से एक साथ बंध गई ये जांबाज महिलाएं उत्तरकाशी पहुंचने के लिए नीलांग घाटी और झाडुंग गांव जैसे खूबसूरत पहाड़ी क्षेत्रों से भी गुजरीं। उत्तरकाशी से ये महिलाएं तिलवाडा, बद्रीनाथ और उसके बाद भारत-चीन सीमा पर स्थित आखिरी गांव माणा पहुंची।

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अभियान दल की एक सदस्य भावना इस्सर ने बताया कि माणा गांव के बाद महिलाएं भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और भारतीय सेना की मदद से माणा दर्रे तक पहुंची। अपने अनुभवों को बांटते हुए भावना ने कहा, ‘अभियान के दौरान हर दिन एक व्यक्ति के तौर पर, एक टीम के तौर पर सीखने का एक नया अनुभव मिला।’

माणा दर्रे पर पहली बार महिलाओं द्वारा मोटरसाइकिल से सफल अभियान पूरा करने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने इस संबंध में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड के लिए भी आवेदन किया है।

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मोटर साइकिल अभियान में हिस्सा लेने वालों में 41 वर्षीया बिजनेस कन्सलटेंट भावना के अलावा शीतल बिदाये (39), साफ्टवेयर डिजायनर कंचन के तम्हानकर (38), फिटनेस एक्सपर्ट तृप्ति सरमालकर (49), एडवरटाइजिंग प्रोफेशनल शुभांगी मांजरेकर (39), इंटीरियर डिजायनर शलाका जाद (38), और 54 वर्षीय इंश्योरेंस एजेंट स्नेह जोशी शामिल थीं।