विजय बहुगुणा और हरीश रावत की फाइल फोटो

मंत्रिमंडल में खाली पद पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक बार फिर अपने विरोधियों को तगड़ा झटका दिया है। सीएम ने अपने करीबी मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी को समाज कल्याण का जिम्मा देकर जता दिया है कि दबाव जितना भी हो, फैसले वो अपने मर्जी से ही करेंगे।

इस पर कांग्रेस विधायकों का एक धड़ा अपनी निराशा खुलकर जाहिर कर रहा है, जिसने मंत्री पद की आस लगा रखी थी। मंत्री सुरेंद्र राकेश के निधन के बाद राज्य मंत्रिमंडल में खाली हुई सीट पर तमाम कयासबाजी काफी समय से चल रही थी।

पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के खेमे ने इस पर कब्जे के लिए अपनी सारी ताकत झौंक दी थी। खुद विजय बहुगुणा ने अस्थायी राजधानी देहरादून से लेकर दिल्ली दरबार तक दबाव बनाया, लेकिन सीएम हरीश रावत ने एक बार फिर बहुगुणा की नहीं सुनकर उन्हें ठेंगा दिखा दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री नरायण दत्त तिवारी के शासनकाल में मंत्री रह चुके कांग्रेस विधायक हीरा सिंह बिष्ट का कहना है कि अगर सीएम को यही फैसला लेना था तो फिर इसमें इतनी देरी क्यों की। बिष्ट कहते हैं कि परिवहन विभाग पर अब भी सीएम ने कोई फैसला नहीं लिया है, जिसकी हालत पतली हो चुकी है।

मुख्यमंत्री हरीश रावत के इस झटके से बहुगुणा खेमे को जबरदस्थ सदमा लगा है। यही वजह है कि मंत्री पद के दावेदार और बहुगुणा के करीबी विधायक सुबोध उनियाल इसे सीएम का विशेषाधिकार बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।

उनियाल का कहना है कि मंत्री पद किसे दिया जाए, ये तो सीएम के विवेक पर निर्भर करता है और मंत्री पद किसी और को देने की बजाए मंत्री को ही जिम्मा बढ़ाने का अगर सीएम ने फैसला किया है तो कुछ सोच कर ही किया होगा।