उत्तराखंड बीजेपी 11 अक्टूबर को ‘लोकतंत्र बचाओ दिवस’ मनाएगी

उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगाते हुए उत्तराखंड में मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी ने बुधवार को कहा कि वह मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों का बहिष्कार करेगी। यही नहीं 11 अक्टूबर को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती को ‘लोकतंत्र बचाओ दिवस’ के रूप में मनाएगी।

गत पांच अक्टूबर को बीजेपी विधायकों द्वारा अपनी मांगों के समर्थन में मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने और उसके बाहर धरना देने के दौरान उनके साथ किए गए कथित दुर्व्यवहार की आलोचना करते हुए प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने कहा कि इससे पता चलता है कि राज्य सरकार विरोध की आवाज को दबाना चाहती है।

अस्थायी राजथानी देहरादून में एक संवाददाता सम्मेलन में रावत ने कहा, ‘लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे बीजेपी विधायकों को जबरन उठाया जाना और उन्हे बंदी बनाया लोकतंत्र की हत्या है। यह किस प्रकार का तंत्र है, जहां विधायकों को भी अपनी भावनाएं व्यक्त करने का अधिकार नहीं है। हमारी बात न सुनकर मुख्यमंत्री ने लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपने असम्मान को ही दर्शाया है।’

लोकनायक जय प्रकाश नारायण को आपातकाल के समय में लोकतांत्रिक मूल्यों की बहाली के लिए संघर्ष का प्रतीक बताते हुए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी 11 अक्टूबर को उनकी 113वीं जयंती को ‘लोकतंत्र बचाओ दिवस’ के रूप में मनाएगी।

उन्होंने बताया कि इस दिन प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी कार्यकर्ता ‘लोकतंत्र की हत्या’ करने के लिए राज्य सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन करेंगे और उसका पुतला फूकेंगे।

रावत ने कहा कि अब से मुख्यमंत्री के सभी कार्यक्रमों का बहिष्कार किया जाएगा तथा पार्टी के विधायक उनके कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि इस दौरान बीजेपी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री को काले झंडे भी दिखाएगे। हालांकि, बीजेपी नेता ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि चमोली जिले में प्रस्तावित राजधानी गैरसैंण में आगामी दो नवंबर से शुरू हो रहे राज्य विधानसभा सत्र की कार्यवाही में पार्टी विधायक हिस्सा लेंगे या नहीं, लेकिन कहा कि पार्टी सत्र के दौरान विधानसभा का घेराव करेगी।

रावत, राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता अजय भट्ट और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हरबंस कपूर सहित बीजेपी के करीब 26 विधायकों ने अपने नेताओं के खिलाफ कथित झूठे मुकदमों को वापस लिए जाने सहित कई मांगों के समर्थन में गत पांच अक्टूबर को मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया था तथा मुख्यमंत्री के मौजूद न होने पर उनके आवास के बाहर धरना दिया था।

एक सरकारी अधिकारी के साथ मारपीट के आरोप में जेल में बंद विधायक अरविंद पांडे की पत्नी और बेटे से मिलने के लिए मुख्यमंत्री रावत द्वारा इंकार कर दिए जाने से पार्टी बहुत क्षुब्ध है।