‘अब पहाड़ों में भी होगी चकबंदी, तीन महीने तक लोगों से लिए जाएंगे सुझाव’

देहरादून।… उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि पर्वतीय भूमि जोत सुधार (चकबंदी) एवं व्यवस्था विधेयक के मंगलवार को सौंपे गए प्रस्तावित प्रारूप को राज्य विधानसभा में पारित कराने से पहले लोगों के सुझाव लेने के लिये तीन माह का व्यापक अभियान चलाया जाएगा।

यहां पर्वतीय चकबंदी सलाहकार समिति द्वारा विधेयक का प्रस्तावित प्रारूप सौंपे जाने के बाद आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रावत ने जनसहभागिता पर बल देते हुए कहा कि चकबंदी पर जनजागरूकता व लोगों के सुझाव लेने के लिए तीन महीने का व्यापक अभियान चलाया जायेगा और उसके बाद उसे विधानसभा में पारित कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पारित होने के बाद जिस दिन यह विधेयक जनता को समर्पित होगा, उस दिन को कृषि दिवस के रूप में मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कृषि की उत्पादकता में सुधार लाने के लिए ‘क्लस्टर एप्रोच’ जैसे कई प्रयोग किए जा रहे हैं जिसमें किसानों और काश्तकारों को एक क्षेत्र में एक ही फसल बोने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि खेतों को एक ही स्थान पर इकट्ठा करने के लिए लोगों की सहमति के साथ कानून बनाने का भी प्रयास किया जा रहा है और इसमें सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी को भी नुकसान न हो। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए रावत ने कहा कि पर्वतीय भूमि जोत सुधार में उनकी भूमिका भी सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने कहा कि कृषि में उत्पादकता के लिए या तो आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना होगा या संस्थागत सुधार करते हुए ‘क्लस्टर एप्रोच’ या चकबंदी जैसे उपायों पर जाना होगा।

कृषि मंत्री हरक सिंह ने कहा कि चकबंदी के लिए लोगों को जागरुक करने के लिए प्रारम्भिक तौर पर 200 गांव लिए गए हैं जिसमें सुनिश्चित किया गया है कि हर ब्लॉक में से कम से कम एक गांव जरूर लिया जाए। इस संबंध में उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता स्वैच्छिक चकबंदी की है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने चकबंदी अपनाने वाले कर गांव को विकास के लिए एक करोड़ रुपये की राशि दी जाएगी।