उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में नैनी-सैनी हवाई पट्टी के विस्तारीकरण में गुणवत्ता की कमी का गंभीर मामला सामने आया है। वहां के हालात देखकर समझा जा सकता है कि किस तरह से गुणवत्ता के साथ समझौता किया गया है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस हवाई पट्टी का हॉटमिक्स बनने से पहले ही उखड़ने लगा है।

48 करोड़ों की लागत से हो रहे काम में मिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है। हवाई पट्टी बनाने की जिम्मेदारी राज्य अवस्थापना निगम की है, जो लगातार निर्माण कार्य के गुणवत्ता से समझौता कर रहा है।

निगम की कार्यप्रणाली की पोल उस वक्त खुल गई जब पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत ने निर्माण कार्यों का जायजा लिया। पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत का कहना है कि वे इस मामले को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास ले जाएंगे।

घटिया हॉटमिक्स के अलावा टर्मिनल हाउस और सुरक्षा दीवारों की गुणवत्ता से भी समझौता किया गया है। निगम की धांधली की पोल मौके पर मौजूद निर्माण सामग्री भी खोल रही है।

नियमों के मुताबिक हवाई पट्टी में उच्च स्तर का बिल्डिंग मैटेरियल लगना चाहिए। लेकिन निगम और ठेकेदारों ने अपनी जेब भरने के लिए स्थानीय स्तर की घटिया सामग्री का प्रयोग किया है।

बॉर्डर के करीब बन रही नैनी-सैनी हवाई पट्टी को पर्यटन के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी अहम माना जा रहा है लेकिन जिस व्यापक स्तर पर निर्माण कार्यों में धांधली हो रही है, उससे हवाई पट्टी के भविष्य पर ही सवालिया निशान लगने लगे हैं।