सत्य और अहिंसा के पुजारी राष्ट्रीय पिता महात्मा गांधी का नाम इतिहास के पन्नों में सदा के लिए अमर है। उन्होंने देश को आजाद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज उनका नाम याद करते हुए गर्व का अनुभव होता है। महात्मा गांधी को राष्ट्र पिता के नाम नवाजा गया है। भले ही महात्मा आज हमारे बीच न हों, लेकिन वह सभी के जहन में बसे हैं। उनके विचार और आदर्श आज हम सबके बीच हैं, हमें उनके विचारों को अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है।

महात्मा गांधी पर कितनी ही किताबें लिखी गई हैं। भारतीय सिनेमा ने भी गांधी के सिद्धांतों को साझा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। देश के बच्चे से लेकर बड़ों तक की जुबां पर उनका नाम उनका नाम अमर है। हम जब भी आजादी की बात करते हैं तो उनका जिक्र होना लाजमी है।

महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ी बातें :
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1859 को गुजरात के पोरबंदर शहर में हुआ। उनके पिता का नाम करमचंद और माता का नाम पुतलीबाई था। उनकी मां धार्मिक विचारों वाली थीं। बापू अपने परिवार में सबसे छोटे थे। उन्होंने अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को आजादी दिलाई, साथ ही संदेश दिया कि अहिंसा सर्वोपरि है। महात्मा गांधी को स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस ने 6 जुलाई 1944 को रेडियो रंगून से ‘राष्ट्रपिता’ कहकर संबोधित किया था।

महात्मा गांधी ने देश को आजादी दिलाने के लिए कई उल्लेखनीय कार्य किए। लेकिन उन्होंने सभी परिस्थितियों में अहिंसा और सत्य का पालन किया और सभी से इसका पालन करने की वकालत भी की। उन्होंने साबरमती आश्रम में अपना जीवन गुजारा और परंपरागत भारतीय पोशाक धोती व सूती चादर लपेटे वह खुद चरखे पर सूत काता करते थे।

वह जीवनभर शाकाहारी रहे और आत्मशुद्धि के लिए लंबे-लंबे उपवास रखे। 30 जनवरी 1948 की शाम को नई दिल्ली स्थित बिड़ला भवन जाते समय मोहनदास करमचंद गांधी की गोली मारकर हत्याकर दी गई। उन्हें गोली मारने वाला नाथूराम गोडसे वहीं झाड़ियों में छिपा था। गांधी के करीब आते ही वह झाड़ी से निकला, उन्हें प्रणाम किया और दनादन गोलियां दाग कर हमारे राष्ट्रपिता के सीने को छलनी कर दिया। महात्मा गांधी की समाधि दिल्ली के राजघाट पर बनी हुई है, जहां अखंड ज्योति हमेशा जलती रहती है।

Bose-Gandhi

महात्मा गांधी का जन्मदिन 2 अक्टूबर को भारत में गांधी जयंती और पूरे विश्व में अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। गांधी को कई गीत भी समर्पित किए गए हैं जो उन्हें भावपूर्ण पुष्पांजलि देते हैं, इसमें प्रमुख है संत कवि नरसी मेहता का लिखा भजन- ‘वैष्णव जन तो तेने कहिये जे, पीर परायी जाणे रे।’

बापू को सच्ची पुष्पांजलि यही होगी कि हम उनके बताए रास्ते पर चलें। दीवारों पर गांधी की तस्वीरें लगाकर उन्हें कितना सम्मान दिया जाता है, यह सबको पता है! ऐसा करना महज दिखावा बन गया है। आज सत्य और अहिंसा पर अमल करने की जरूरत भारत ही नहीं, समूचे विश्व को है।

स्वच्छता अभियान चलाएगी दिल्ली मेट्रो
दिल्ली मेट्रो के अधिकारी और कर्मचारी गांधी जयंती के अवसर पर शुक्रवार को सभी स्टेशनों पर स्वच्छता अभियान चलाएंगे और ‘स्वच्छता का संकल्प’ लेंगे। डीएमआरसी ने गुरुवार को बताया कि संचालन और रखरखाव विंग के अधिकारी और कमर्चारी सुक्रवार को सभी मेट्रो स्टेशनों पर ‘स्वच्छता का संकल्प’ लेंगे।

डीएमआरसी ने बताया कि दिल्ली मेट्रो के अधिकारी और कर्मचारी सभी स्टेशनों पर सुबह नौ बजे स्वच्छता अभियान चलाएंगे।

युवा कांग्रेस पदयात्रा आयोजित करेगी
गांधी जयंती के मौके पर युवा कांग्रेस शुक्रवार को देशभर में गांधी संदेश यात्रा शुरू करेगी। यह यात्रा ऐसे समय में आयोजित की जा रही है, जब कांग्रेस एनडीए सरकार पर पार्टी के राष्ट्रीय प्रतीकों को ‘हड़पने’ की कोशिश करने का आरोप लगा रही है। युवा कांग्रेस ने नई दिल्ली में एक बयान में बताया कि राजधानी में गांधी संदेश यात्रा शुक्रवार दोपहर बाद रायसीना रोड से शुरू होकर राजघाट स्थित गांधी स्मृति पर समाप्त होगी। यह यात्रा करीब पांच किलोमीटर की होगी।

युवा कांग्रेस ने अपने इस कार्यक्रम को ऐसे दिन अंतिम रूप दिया जब बीजेपी नेता विजय गोयल ने राष्ट्रपिता के जन्मदिवस से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तुलना महात्मा गांधी से करते हुए गुरुवार को दोनों को ‘साबरमती का संत’ बताया।

गोयल ने अशोक रोड स्थित बीजेपी मुख्यालय के सामने मौजूद अपने निवास पर महात्मा गांधी के साथ मोदी के फोटो वाली होर्डिंग लगाई है। इनमें लिखा गया है, ‘दे दी दुनिया में पहचान नई, ऊंचा किया भाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।’