अद्भुत, आस्था, परंपरा, सभ्यता और संस्कृति का चतुष्कोणीय भव्य दर्शन है जोशीमठ में फुलकोठ। यहां ब्रह्म कमल के रूप में भगवान शिव आते हैं और मां पार्वती के रूप में यहां विराजमान हैं मां चंडिका। ये अद्भुत मिलन होता है जोशीमठ के नरसिंह मंदिर और रविग्राम के चंडिका देवी मंदिर में।

यहां जो बुग्यालों से ब्रह्म कमल आते हैं, उन्हीं से शिव का अर्धनारीश्वर अवतार बनाया जाता है। मंदिर में एक जगह जिसे कोठ कहा जाता है, जिसमें बुग्याल से आए ब्रह्म कमल लगाए जाते हैं और प्राण प्रतिस्था कर उस कोठ और ब्रह्म कमल में अर्धनारीश्वर अवतार के रूप में ब्रह्म कमल लगाए जाते हैं।

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यहां की परंपरा है कि जैसे ही प्राण प्रतिस्था कर भगवान को विराजमान किया जाता है, वैसे ही गांव के 200 परिवारों के सभी लोग यहां मंदिर में दो दिनों तक घी के दिए जलाए रखते हैं। इन दो दिन कोई भी गांव वाला सोता तक नहीं है। मंदिर में ही सभी जन चांचडी भजन-कीर्तन करने में लगे होते हैं।

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इस फुलकोठ से ही श्राद्ध पक्ष भी शुरू हो जाते हैं। इस फुलकोठ में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रहती हैं। जोशीमठ के नरसिंह मंदिर और रविग्राम में मनाया जाता है यह पर्व। दरअसल फुलकोठ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस फुलकोठ से पहले दिन दोनों गांव से दो-दो लोग पैदल नंगे पैर 3,500 से 4,000 मीटर की ऊंचाई पर जाते हैं और अगले दिन सुबह उठते ही नहाने के बाद बुग्यालों से ब्रह्म कमल निकालकर अपनी कंडियों में भरते हैं।

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इसके बाद कंडियां भर जाने के बाद ये लोग वापस अपने-अपने गांव के लिए निकलते हैं, जिस दिन ये लोग वापसी करते हैं, उस दिन ये लोग सारे रास्तेभर कुछ भी नहीं खाते हैं और जो ब्रह्म कमल का फूल ये लोग लेकर आते हैं, उन्हें मंदिर के कोठ में लगाया जाता है और इसीलिए इसे फुलकोठ कहा जाता है।