देहरादून के बीएस सिद्धू का डीजीपी के पद पर दो साल का कार्यकाल पूरा हो गया है। दो साल का कार्यकाल पूरा होने के मौके पर उन्होंने भी नेताओं की तरह एक विवादित बयान दिया है। उनका कहना है कि जब-जब राज्य में चुनाव होते हैं सांप्रदायिक दंगे बढ़ जाते हैं।

उनका कहना है कि दंगे के आड़ में कुछ लोग अपनी सियासी रोटियां सेंकने का काम करते हैं। राज्य में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव की घड़ी नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे दंगों के होने की आशंका भी बढ़ रही है। दो दिन पहले कोटद्वार में हुए मामूली विवाद को लेकर दो पक्षों में बवाल हो गया। दोनों तरफ से हुए पथराव में कई लोग घायल हो गए।

उनका कहना है घटना की वजह चाहे जो भी लेकिन जिस तरह से छोटी सी छोटी बात को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है। यकीनन पुलिस जवानों को ऐसे दंगाइयों से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है, जिससे कानून व्यवस्था कामम रहे और समाज में आपसी सौहार्द का वातावरण भी बना रहे।

डीजीपी का कहना है कि अब दंगे को सिसायी रंग दिया जा रहा है, जो समाज के हित में नहीं है लेकिन चुनाव जीतने के लिए अगर कोई कानून व्यवस्था को तोड़ने का काम करता है या फिर दंगे फैलाने की कोशिश करता है तो ऐसे आसामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाए जाएंगे।

डीजीपी के बेबाक बयान को लेकर तरह-तरह की चर्चा हो रही है। वैसे बीएस सिद्धू का छह महीने में कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। 30 अप्रैल 2016 को डीजीपी बीएस सिद्धू रिटायर हो जाएंगे।

उनका कहना है कि कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार पुलिस जवानों के सामने चुनौतियां बढ़ती जा रही है। पुलिस जवान लगातार कानून व्यवस्था को मजूबत बनाने की दिशा में काम भी कर रहे हैं लेकिन जिस तरह आपसी कहा सुनी को साम्प्रदायिक रंग दिया जा रहा है, यह पुलिस जवानों के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।