नई दिल्ली।… हरिद्वार और ऋषिकेश में प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने वाले राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सोमवार को उत्तराखंड सरकार से पूछा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मंजूरी के बगैर कुछ होटल, आश्रम और धर्मशालाएं कैसे चल रहे हैं।

एनजीटी प्रमुख न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में रिपोर्ट मांगने के साथ ही राज्य सरकार और उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इन होटलों, आश्रमों और धर्मशालाओं से निकलने वाले गंदे पानी की स्थिति के बारे में बताने का निर्देश दिया।

पीठ ने इस मामले में अगली सुनवाई 14 अक्टूबर तय करते हुए कहा कि बोर्ड और नगर निगम हमें बताएं कि हरिद्वार, ऋषिकेश और ऊपर के कितने होटल, आश्रम और धर्मशालाएं बोर्ड की मंजूरी के बगैर चल रहे हैं और इनमें से कितनी इकाइयों के पास सीवेज कनेक्शन नहीं है।

उन्होंने कहा कि वे हर होटल, आश्रम और धर्मशाला की क्षमता भी बताएं। एनजीटी का निर्देश ऐसे समय आया जब उत्तराखंड सरकार ने हरिद्वार, ऋषिकेश और ऊपरी क्षेत्र में संचालित होटलों, आश्रमों और धर्मशालाओं की सूची उसे सौंपी है। सूची के अनुसार, हरिद्वार और ऋषिकेश में 396 होटल, 431 आश्रम और 256 धर्मशाला संचालित हो रहे हैं।