श्रीहरिकोटा।… भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ‘एस्ट्रोसैट’ और छह विदेशी उपग्रहों को लेकर जाने वाले रॉकेट का श्रीहरिकोटा से सोमवार सुबह सफल प्रक्षेपण किया। इस एस्ट्रोसैट की मदद से ब्रह्मांड को समझने में मदद मिलेगी। अमेरिका, यूरोपियन यूनियन और जापान के बाद ऐसा करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बन गया।

यह रॉकेट अपने साथ 1,513 किलोग्राम वजनी 180 करोड़ रुपये की लागत वाले भारतीय एस्ट्रोसैट उपग्रह के अलावा अमेरिका के चार और इंडोनेशिया व कनाडा के एक-एक उपग्रहों को ले गया। एस्ट्रोसैट को पृथ्वी से 650 किलोमीटर की ऊंचाई पर कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

रॉकेट का प्रक्षेपण सुबह ठीक 10 बजे किया गया। 44.4 मीटर लंबा और 320 टन वजनी ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान एक्सएल (पीएसएलवी-एक्सएल) यहां रॉकेट पोर्ट पर लांच पैड से अलग हुआ। ‘एस्ट्रसैट’ देश का पहला बहु-तरंगदैर्ध्य वाला अंतरिक्ष निगरानी उपग्रह है, जो ब्रह्मांड के बारे में अहम जानकारियां प्रदान करेगा।

50 घंटे पहले शुरू की गई थी उलटी गिनती…
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने भारत के एस्ट्रोसैट सहित सात उपग्रहों को ले जाने वाले रॉकेट के प्रक्षेपण की उल्टी गिनती 50 घंटे पहले शुरू कर दी थी। एस्ट्रोसैट की मदद से ब्रहमांड को समझने में मदद मिलेगी। इसरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने श्रीहरिकोटा से रविवार को कहा था कि बिना किसी बाधा के उल्टी गिनती जारी है।

अमेरिका, इंडोनेशिया और कनाडा के उपग्रह भी साथ…
सोमवार सुबह प्रक्षेपित होने वाला यह रॉकेट अपने साथ 1,513 किलोग्राम वजनी 180 करोड़ रुपये की लागत वाले भारतीय एस्ट्रोसैट उपग्रह के अलावा अमेरिका के चार और इंडोनेशिया और कनाडा के एक-एक उपग्रहों को ले गया।

यह देगा महत्वपूर्ण जानकारियां…
ISRO-Astrosat

देश का पहला बहु-तरंगदैर्ध्य वाला अंतरिक्ष निगरानी उपग्रह एस्ट्रोसैट ब्रह्मांड के बारे में अहम जानकारियां देगा। सोमवार को छह विदेशी उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण के साथ ही भारत ने अंतरिक्ष अनुसंधान की दिशा में 50 साल पूरे कर लिए हैं।

इसरो ने 2010 में एक साथ 10 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया था, जिसमें भारत के दो काटरेसैट-2ए उपग्रह भी शामिल थे। सोमवार को भारत ने तीसरी बार एक साथ सात उपग्रहों का प्रक्षेपण किया है। उड़ान भरने के 22 मिनट बाद रॉकेट धरती की सतह से 650 किलोमीटर की ऊंचाई पर एस्ट्रोसैट को उसकी कक्षा में स्थापित किया जाना तय था।