एनजीटी ने उत्तराखंड सरकार से मांगी हरिद्वार व ऋषिकेश के आश्रमों और गेस्ट हाउसों की सूची

नई दिल्ली।… हरिद्वार और उसके आसपास के क्षेत्रों में प्लास्टिक पर पूरी तरह से प्रतिबंध का निर्देश दे चुके राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने एक बार फिर उत्तराखंड सरकार को वहां तेजी से उभर रहे अनधिकृत उद्योगों एवं होटलों को लेकर सजग किया है।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार ने राज्य सरकार के अधिकारियों से सवाल किया, ‘क्या आपके पास आश्रमों एवं गेस्ट हाउसों की सूची है? क्या वे पंजीकृत हैं या नहीं? यदि कोई उसे आश्रम या गेस्ट हाउस कहता है तो क्या वे पंजीकरण से मुक्त हैं? प्लास्टिक विनिर्माण इकाइयों की क्या स्थिति है? क्या वे बिना मंजूरी के चल रहे हैं? आपने क्या कार्रवाई की है?’

पीठ ने राज्य सरकार एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को (नगर) निगम के साथ संवाद कर हरिद्वार, ऋषिकेश और उससे आगे चल रहे होटलों, आश्रमों और गेस्ट हाउसों की पूरी सूचना जमा करने को कहा है। यह सूची अगली सुनवाई की तारीख 28 सितंबर तक अधिकरण के सामने रखी जाए।

सुनवाई के दौरान उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पीठ से कहा कि उसने अखबारों में इश्तहार देकर कहा कि प्लास्टिक विनिर्माण इकाइयां चलाने के लिए मंजूरी अनिवार्य है।

इस पर पीठ ने कहा कि अधिकरण के सामने पेश विज्ञापन की प्रति में यह कहीं नहीं लिखा है कि उल्लंघन की स्थिति में बोर्ड क्या कार्रवाई करेगा। तत्काल उसमें परिशुद्धि जारी की जाए और उसकी प्रति अगली सुनवाई की तारीख को पीठ के सामने पेश की जाए।

अधिकरण ने इससे पहले हरिद्वार, ऋषिकेश एवं आसपास के क्षेत्रों में पॉलीथिन बैगों के इस्तेमाल पर रोक से संबंधित आदेश का पालन नहीं किए जाने को लेकर उत्तराखंड सरकार की खिंचाई की थी।