देहरादून।… उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि राज्य सरकार डॉक्टरों को देश के अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर तनख्वाह दे रही है, लेकिन इसके बावजूद राज्य में डॉक्टरों का अभाव बना हुआ है।

यहां अंतरराष्ट्रीय फार्मासिस्ट दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि कुछ व्यवसाय ऐसे होते हैं जिन्हें धन के तराजू में नहीं तौला जा सकता और चिकित्सा का व्यवसाय भी ऐसा ही है जिसमें मानवीय पहलू को ध्यान में रखकर काम किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में कई गांव ऐसे हैं जहां से डॉक्टर निकले हैं, परंतु दुर्भाग्यवश वे डॉक्टर भी अपने गांवों में सेवा देने के लिए आगे नहीं आते। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार डॉक्टरों को देश के किसी भी राज्य की तुलना में कहीं बेहतर वेतन पैकेज दे रही है फिर भी डॉक्टरों का अभाव है।

हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्य में जहां डॉक्टरों का अभाव है, वहां फार्मासिस्टों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि दूर सीमावर्ती गांवों में फार्मासिस्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

इस संबंध में उन्होंने राज्य में कार्यसंस्कृति में सुधार लाने का भी आह्वान किया और कहा कि हममें यह भावना होनी चाहिए कि अपनी नियमित ड्यूटी के साथ ही राज्य को और अतिरिक्त क्या दे सकते हैं।

विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा अपनी मांगों के लिए किए जाने वाले प्रदर्शनों की ओर इशारा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें परिस्थितियों को समझना चाहिए और अगर आज हमने कोई गलती कर दी तो अर्थव्यवस्था गड़बड़ हो सकती है और सातवें वेतन आयोग के बाद कर्मचारियों को समय पर वेतन देने की समस्या भी हो सकती है।