देहरादून।… उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने धन की अनुपलब्धता और केंद्र पर असहयोग के झूठे आरोप लगाने के लिए राज्य की हरीश रावत सरकार को आड़े हाथों लिया। बुधवार को कोश्यारी ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह ऐसा आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास कार्यों में अपनी विफलता छिपाने के लिए कर रही है।

कोश्यारी ने देहरादून में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा, ‘मैं समाचार पत्रों में सत्ताधारी कांग्रेस के उन बयानों को पढ़ता रहता हूं, जिनमें कहा जा रहा है कि साल 2013 में आयी प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए गांवों के पुनर्वास और पुनर्विस्थापन के लिए केंद्र धन उपलब्ध नहीं करा रहा है।’

उन्होंने कहा, केंद्र के खिलाफ लगाए जा रहे ये आरोप निराधार हैं और राज्य सरकार प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और करीब 300 से अधिक गांवों के लिए निश्चित योजना बनाने में अपनी विफलता से जनता का ध्यान हटाने के लिए जान बूझकर ऐसे आरोप लगा रही है।

नैनीताल से बीजेपी सांसद कोश्यारी ने आरोप लगाया कि असलियत में राज्य सरकार के पास साल 2013 की प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए लोगों का पुनर्वास करने की इच्छाशक्ति ही नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘आपको कोका कोला को बॉटलिंग प्लांट लगाने के लिए जमीन देने में कोई समस्या नहीं है लेकिन जब बात आपदा प्रभावित लोगों के पुनर्वास और विस्थापन की आती है तो आप दूसरी तरफ देखने लगते हैं, क्योंकि आपको इसके बदले कोई कमीशन नहीं मिलने वाला है। कोका कोला कंपनी को बॉटलिंग प्लांट लगाने के लिए विजय बहुगुणा सरकार के कार्यकाल में देहरादून के करीब छरबा गांव में जमीन दी गई थी। हालांकि, स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों के जबरदस्त विरोध के बाद यह परियोजना अस्तित्व में नहीं आ पायी।

चौदहवें वित आयोग की सिफारिशों के अनुसार राज्यों को दी जा रही भारी धनराशि का जिक्र करते हुए कोश्यारी ने कहा कि यह विचित्र बात है कि इसके बावजूद राज्य सरकार कथित ‘धन की कमी’ और केंद्र के राज्य के प्रति सौतेले व्यवहार का रोना रोए जा रही है।

कोश्यारी ने कहा, ‘वास्तविकता यह है कि राज्य सरकार प्रभावित लोगों के लिए ढंग का कुछ भी करने में अब तक विफल रही है और अपनी विफलताओं से जनता का ध्यान हटाने के लिए वह केंद्र को दोषी ठहराती रहती है।’ इस संबंध में उन्होंने पूछा कि क्या राज्य सरकार ने ऐसा कोई सर्वेक्षण कराया है कि कितने गांवों का विस्थापन किया जाना है और क्या उन क्षेत्रों को चिन्हित कर लिया गया है, जहां विस्थापित जनता को बसाया जाना है।’

कोश्यारी ने आरोप लगाया कि त्रासदी को गुजरे दो साल से ज्यादा बीत जाने के बावजूद अब तक ऐसी कोई कवायद नहीं की गई है और विस्थापित होने वाले गांवों की संख्या के संबंध में केंद्र को राज्य की ओर से विरोधाभासी रिपोर्ट भेजी जा रही है।

राज्य सरकार से केंद्र को जिम्मेदार ठहराने के आरोप लगाना बंद करने की नसीहत देते हुए बीजेपी नेता ने कहा कि उसे सही मायनों में प्रभावित गांवों के विस्थापन की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर जल्दी ही ऐसा नहीं किया गया तो सीमावर्ती क्षेत्रों की जनता में असंतोष पनपने लगेगा जो उत्तराखंड जैसे सामरिक महत्व के राज्य के लिए अच्छा नहीं होगा।

मुख्यमंत्री हरीश रावत पर अहंकार में डूबने का आरोप लगाते हुए कोश्यारी ने आरोप लगाया कि सरकारी कार्यक्रमों में स्थानीय सांसदों को नहीं बुलाया जाता है। उन्होंने कहा, ‘हरीश रावत इमरजेंसी की उपज हैं और संपूर्ण विपक्ष को खत्म कर चीजों को अकेले करने में विश्वास करते हैं। अपने क्षेत्रों में होने वाले सरकारी कार्यक्रमों में विपक्षी सांसदों को दूर रखा जाता है। क्या यह उस जनता का अपमान नहीं है जिसने उन्हें चुना है। मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि वह सत्ता में हमेशा के लिए नहीं आए हैं।’