उत्तराखंड के चार विधायकों को उत्कृष्ट विधायक अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। राज्यपाल डॉ. केके पॉल ने इन चारों विधायकों को सम्मानित किया। सम्मानित होने वाले विधायकों में जोत सिंह गुंसोला, अमृता रावत, मदन कौशिक और इंदिरा हृदयेश शामिल हैं।

हरिद्वार बाइपास के एक होटल सभागार में आयोजित हुए सम्मान समारोह में साल 2010 के लिए जोत सिंह गुनसोला (कांग्रेस) को, वर्ष 2011 के लिए अमृता रावत (कांग्रेस), वर्ष 2012 के लिए मदन कौशिक (बीजेपी) को और वर्ष 2013 के लिए इंदिरा हृदयेश (कांग्रेस) को उत्कृष्ट विधायक के सम्मान से नवाजा गया।

साल 2008 में उत्कृष्ट विधयक चयन का फैसला लेते हुए पुरस्कार शुरू किया गया था, जिसमें पहला सम्मान तत्कालीन संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत को दिया गया था। उसके बाद साल 2009 में प्रीतम सिंह को उत्कृष्ट विधायक पुरस्कार दिया गया था। देश में उत्तराखंड सहित केवल 4 राज्यों में उत्कृष्ट विधायक चुने जाने की परंपरा है।

समारोह में बोलते हुए स्पीकर ने अन्य विधायकों को भी प्रेरणा मिलने की जताई उम्मीद है और कहा कि विश्व में आतंकवाद एवं गृह युद्ध जैसी समस्याएं हैं। स्पीकर गोविन्द सिंह कुंजवाल ने कहा कि स्वस्थ और मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था ही अहम होती है।

उन्होंने मौजूदा समय में सदन के सदस्यों की भूमिका और जिम्मेदारी को बढ़ा हुआ बताया है और कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से ही जनता की समस्याओं का समाधान संभव हैं। उन्होंने अनुशासन की जरूरत सदन के अंदर और बाहर भी बताई है साथ ही लोकतांत्रिक मूल्यों पर चलकर आगे बढ़ने की उम्मीद जताई।

लोकसभा के पूर्व महासचिव जीसी मल्होत्रा ने कहा कि 1992 में उत्कृष्ट सांसद पुरस्कार की शुरुआत हुई थी। सबसे पहले सांसद इंद्रजीत गुप्ता को सम्मानित किया गया था। उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता सम्मान से अन्य सदस्यों को भी प्रेरणा मिलती है साथ ही लोकसभा के कई संस्मरण भी सुनाए।

नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट का सम्मान समारोह में सम्बोधन हुआ, उन्होंने उत्कृष्ट विधायक सम्मान पाने वाले विधायकों को बधाई देने के साथ ही कहा कि लोकतांत्रिक परम्पराओं को निभाते हुए विपक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।

उन्होंने विधायकों की तरह उत्कृष्ट नेता प्रतिपक्ष और उत्कृष्ट मंत्री का चयन करने का भी सुझाव दिया। सभी राज्यों से चयन करके केंद्र स्तर पर सम्मान देने की बात कही। साथ ही विधानसभा अध्यक्षों में से भी उत्कृष्ट स्पीकर चुने जाने का भी सुझाव दिया।

राज्यपाल डॉ कृष्ण कांत पॉल ने भी समारोह को संबोधित किया और कहा कि सदन में चर्चा होनी चाहिए व्यवधान नहीं। साथ ही राज्यपाल ने सम्मान पाने वाले विधायकों को बधाई दी और कहा कि उत्कृष्ट विधायक सम्मान समारोह से अन्य विधायकों को भी सदन में अच्छा काम करने की प्रेरणा मिलेगी।

राज्यपाल का कहना था कि संसदीय परम्पराओं का सदैव ही निर्वहन हुआ है, लेकिन सदन के सामने हाल के वर्षों में कई चुनौतियां आई हैं। ये भी समझना ज़रूरी है कि कभी-कभी सामने वाला भी सही होता है। राष्ट्रपति के दौरे और सम्बोधन का भी राज्यपाल ने अपने सम्बोधन में ज़िक्र किया साथ ही सदस्यों से गरिमापूर्ण आचरण से लोकतांत्रिक प्रणाली मजबूत करने की अपेक्षा भी जताई।