तमाम कांग्रेसी नेता अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उद्योगपति अडानी को बढ़ावा देने का आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन लगता है उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत भी पीएम मोदी से सीख लेकर अब उद्योगपतियों के साथ मिलकर राज्य को विकास के पथ पर ले जाने की ठान चुके हैं।

उत्तराखंड में निवेश की तैयारी कर रहे अडानी औद्योगिक समूह के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत के सामने अपनी योजनाओं का खाका पेश किया। इस मशहूर औद्योगिक घराने ने सोलर प्लांट के अलावा कूड़े से बिजली बनाने वाले संयत्र लगाने का प्रस्ताव भी रखा। बुधवार को कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी शासन के वरिष्ठ अफसरों के साथ बैठक करेंगे।

बीजापुर स्टेट गेस्ट हाउस में अडानी औद्योगिक समूह की टीम ने उत्तराखंड में उद्योग स्थापित करने की संभावनाओं पर सीएम से बात की। इस दौरान सीएम के औद्योगिक सलाहकार रणजीत रावत, मुख्य सचिव राकेश शर्मा समेत तमाम अधिकारी मौजूद रहे।

अडानी ग्रुप के प्रतिनिधियों ने बताया कि कंपनी राज्य में एक हजार मेगावाट का सोलर पावर प्लांट लगाना चाहती है। इसके अलावा समूह ने खाद्य प्रसंस्करण, हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट लगाने के लिए भी इच्छा व्यक्त की। खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अडानी ग्रुप का बड़ा काम है। हिमाचल का ज्यादातर सेब यही ग्रुप खरीदता है।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने समूह के अधिकारियों को प्रदेश में एक वाइनरी लगाने और राइस से बनने वाले रिफाइंड तेल का कारखाना स्थापित करने की सलाह भी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस काम में कोई दिक्कत पैदा नहीं होने दी जाएगी। अडानी समूह प्रदेश में कूड़े से बिजली बनाने के संयंत्र लगाने का भी इच्छुक है। देहरादून और रुड़की नगर निगम क्षेत्र में लगने वाले इन संयंत्रों को लेकर जारी की गई निविदाओं में अडानी समूह भाग लेगा।

इसके अलावा हल्द्वानी में करीब साढ़े तीन सौ करोड़ की लागत से संयंत्र लगाने की सहमति बनी। यह प्लांट चार मेगावाट की क्षमता का होगा और डेढ़ मेगावाट बिजली इसी में खर्च होगी। रणजीत रावत ने बताया कि कई मुद्दों पर सहमति बनी है। अडानी बड़ा औद्योगिक समूह है। मुख्यमंत्री का मत इस मामले में पूरी तरह स्पष्ट है कि यह समूह राज्य में जो भी इंडस्ट्री स्थापित करना चाहता है उसके लिए पूरी मदद दी जाएगी।

उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने कहा, अडानी देश का बहुत बड़ा समूह है। ग्रुप राज्य में निवेश करता है तो यह हमारे हित में है। लेकिन सरकार को अपना सिस्टम बदलना होगा, दिखावे के सिंगल विंडो सिस्टम को वास्तविक रूप में लागू करना होगा। कहीं ऐसा ना हो कि निवेश करने वाले दुखी होकर वापस चले जाएं।