नई दिल्ली।… आईटीबीपी के जवान गंगा नदी को स्वच्छ बनाने के सरकार के मिशन में योगदान के तहत अगले महीने 2350 किलोमीटर लंबे ‘स्वच्छ गंगा’ नदी राफ्टिंग अभियान पर जाएंगे।

केंद्रीय मंत्री उमा भारत दो अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर उत्तराखंड के देवप्रयाग में इस अभियान को रवाना कर सकती हैं, जिसका समापन दिसंबर में बंगाल की खाड़ी में होगा।

इस दल में आईटीबीपी के विशेष रूप से प्रशिक्षित 30 कुशल कर्मी होंगे। दल पांच राज्यों-उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के 49 शहरों से गुरेगा।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘योजना यह है कि उन विभिन्न स्थानों पर भारत तिब्बत सीमा पुलिस के 10 हजार से अधिक कर्मी स्वच्छता अभियान में शामिल होंगे, जहां से यह अभियान दल गुजरेगा। उस दौरान दल पानी और मिट्टी के नमूने लेकर उन्हें प्रयोगशालाओं को सौंपेगा ताकि नदी में प्रदूषण के स्तर का पता चल सके।’

उन्होंने कहा, ‘पर्यावरण मंत्रालय के दिशानिर्देश के मुताबिक टीम नदी से पॉलिथिन एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थ भी एकत्र करेगी और उनका निस्तारण करेगी।’ ‘नमामि गंगे’ के तहत टीम ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ और ‘स्वच्छ भारत अभियान’ जैसी सरकार की पहलों के बारे में जागरुकता फैलाएगी।

साउथ एशियन नेटवर्क ऑन डॉम, रिवर एंड पीपल्स के संयोजक हिमांशु ठक्कर ने कहा कि उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर बनने वाली जलविद्युत परियोजनाएं गंगा की अविरल धारा के मार्ग में बड़ी बाधा हैं। इसके कारण गंगा नदी समाप्त हो जाएगी, क्योंकि नदी पर बांध बनाने की परियोजनाएं इसके उद्गम पर ही अवस्थित हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि नदियों को संरचना के आधार पर कई वर्गों में बांटा गया है। गंगा, यमुना जैसी नदियां पांचवे-छठे क्रम की नदियां हैं और इनकी निर्मलता एवं अविरलता के बारे में बात करने से पहले पहले, दूसरे, तीसरे क्रम की नदियों की बात की जानी चाहिए, जिनकी लम्बाई 5 किलोमीटर, 10 किलोमीटर, 20 किलोमीटर या 30 किलोमीटर है और जिनकी जलधाराओं से बड़ी नदियों बनी है। ऐसी छोटी नदियां सूख रही हैं, जिससे बड़ी नदियों के समक्ष खतरा उत्पन्न हो रहा है।

एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि पिछले कुछ समय में उत्तराखंड में 107 जलधाराएं सूख गई हैं जो गंगा में मिलती हैं। गंगा नदी के समक्ष इसकी धारा पर मौजूद उद्योगों की गंदगी और कचरा बड़ी समस्या है। जल संसाधन एवं नदी विकास मंत्रालय के राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण से प्राप्त जानकारी के अनुसार, गंगा नदी पर कुल 764 उद्योग अवस्थित हैं, जिनमें 444 चमड़ा उद्योग, 27 रासायनिक उद्योग, 67 चीनी मिलें, 33 शराब उद्योग, 22 खाद्य एवं डेयरी, 63 कपड़ा एवं रंग उद्योग, 67 कागज एवं पल्प उद्योग एवं 41 अन्य उद्योग शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में गंगा तट पर स्थित इन उद्योगों द्वारा प्रतिदिन 112.3 करोड़ लीटर जल का उपयोग किया जाता है। इनमें रसायन उद्योग 21 करोड़ लीटर, शराब उद्योग 7.8 करोड़ लीटर, कागज एवं पल्प उद्योग 30.6 करोड़ लीटर, चीनी उद्योग 30.4 करोड़ लीटर, चमड़ा उद्योग 2.87 करोड़ लीटर, कपड़ा एवं रंग उद्योग 1.4 करोड लीटर एवं अन्य उद्योग 16.8 करोड़ लीटर गंगा जल का उपयोग प्रतिदिन कर रहे हैं।