नई दिल्ली।… हिमालय की प्राचीन वादियों के बीच बसे धनाचुली गांव और नैनीताल में अकसर अनुपम प्राकृतिक सुंदरता के दर्शन के लिए पर्यटक आते रहते हैं। लेकिन अबकी बार प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ही उनके यहां आने का कारण साहित्य भी होगा।

इस साल 23 अक्टूबर से शुरू होने वाले कुमाऊं साहित्य उत्सव (केएलएफ) के पहले संस्करण में लेखक, राजनयिक, कवि, आलोचक, खानसामे, वकील और दर्शकों की बड़ी भीड़ दिखाई देगी।

कुमाऊं साहित्य उत्सव के संस्थापक सुमंत बत्रा ने कहा, ‘कुमाऊं साहित्य उत्सव हमारी व्यापक दृष्टि का एक हिस्सा है। हम इस जगह को एक सांस्कृतिक गढ़ बनाना चाहते हैं। हम कई पहल कर रहे हैं और साहित्य उत्सव उसी का एक हिस्सा है।’ पांच दिनों का उत्सव 23 से 25 अक्टूबर तक धनाचुली में चलेगा और इसके बाद दो दिन नैनीताल में आयोजित होगा।

उत्तराखंड के इस पर्वतीय सैरगाह में पहाड़ों की पृष्ठभूमि में कई सत्रों का आयोजन होगा। ये सत्र कुमाऊं के लोकसाहित्य, कुमाऊं के इतिहास, प्रकृति से प्रेरित कविता आदि से संबंधित होंगे।

प्रतिष्ठत लेखक, सिनेमा एवं मीडिया की कई हस्तियां उत्सव में शामिल होंगी। आयोजक साथ ही उत्सव के दौरान ‘अ ट्रीट टू धनाचुली विलेज’ जैसे अलग तरह के कार्यक्रम, कल्पनाशीलता से भरे कार्यक्रम, खाने-पीने के इतिहास पर बातचीत आदि आयोजित करेंगे।

केएलएफ ने यूएन वीमेन, ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग, फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया जैसे संस्थानों के साथ भागीदारी की है।