देहरादून।… हरिद्वार में गंगा नदी के आसपास के इलाके में इस साल खनन और चुगान के लिए 35 पटटों को अनुमति दी गई थी, जिनके माध्यम से फरवरी से जून 2015 की समयावधि में लगभग 3.40 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।

देहरादून में जारी एक सरकारी विज्ञप्ति में हरिद्वार के जिलाधिकारी एच.सी. सेमवाल के हवाले से बताया गया कि हरिद्वार में गंगा के आस-पास कहीं अवैध खनन और चुगान नहीं हो रहा है और जो भी चुगान किया जा रहा है, वह नीति के तहत हो रहा है।

जिलाधिकारी ने बताया कि हरिद्वार जिले में इस साल राज्य सरकार द्वारा 74 खनन पट्टे मंजूर किए गए हैं और वर्षाकाल प्रारम्भ होने से पूर्व इनमें से 35 पट्टों पर खनन और चुगान कार्य की अनुमति प्रदान की गई थी।

उन्होंने बताया कि बारिश शुरू होने से पहले ही इन पटटों पर खनन और चुगान की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी, लेकिन पहले से संचालित खनन पट्टों से फरवरी से जून की समयावधि में लगभग 3.40 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।

सेमवाल ने कहा कि केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा हरिद्वार में गंगा व उसकी सहायक नदियों में रेत और बजरी चुगान को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही सभी नदियों में चुगान आरंभ कर दिया जाएगा।

सेमवाल ने बताया कि हरिद्वार में 1,380 हैक्टेयर क्षेत्र में ही रेत बजरी चुगान की अनुमति दी जाएगी। जिलाधिकारी ने बताया कि हरिद्वार जिले में कृषकों को अपनी कृषि भूमि पर जमा मलबा हटाने तथा उसे कृषि योग्य बनाने के लिए उन्हें चुगान की अनुमति दी गई थी और उन्होंने रायल्टी के रूप में 73.40 लाख रुपये राजकोष में जमा भी कराए। लेकिन जिले में भारी बारिश होने से गंगा एवं सहायक नदियों के जलस्तर में वृद्धि होने तथा अवैध खनन को रोकने के दृष्टिगत बाद में समस्त अनुमति निरस्त कर दी गई थी।

सेमवाल ने बताया कि अवैध खनन रोकने के लिए खनन रोधी बल, पुलिस, वन, खनन, राजस्व विभाग द्वारा समय-समय पर खनन क्षेत्रों में कार्यवाही की जाती है तथा अवैध खनन सम्बन्धी कार्यों में प्रयुक्त मशीनरी आदि पर नियमानुसार जुर्माना लगाया जाता है।

उन्होंने कहा कि जिले में वर्तमान में 54 स्टोन क्रशर शासन द्वारा अनापत्ति प्राप्त होने के उपरान्त ही संचालित किए जा रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने कहा कि समय-समय पर स्टोन क्रशरों की सक्षम अधिकारियों द्वारा जांच की जाएगी तथा किसी भी प्रकार की अनियमित्ता पाए जाने पर नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

गौरतलब है कि मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी आरोप लगाती रही है कि सरकार प्रदेश में नदी किनारे स्थित किसानों की भूमि पर चुगान की अनुमति देकर अवैध खनन को बढावा दे रही है जिससे राजस्व को भी लाखों रू. का नुकसान हो रहा है।