कुमाऊं की ऐपण कला को राज्य कला का दर्ज़ा – मुख्यमंत्री

अब ऐपण डालना और गर्व की बात बन चुकी है क्यूंकि अब उसको राज्य कला का दर्ज़ा मिल चुका है। जी हाँ! इसकी घोषणा मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अल्मोड़ा में की।

आपको बतादें कुमाऊं के लोग ऐपण, किसी शुभ कार्य अथवा दीपावली के शुभ अवसर पर अपने घरों के मंदिर और देहलीज़ पर डालते हैं। विवाह और नामकरण संस्कार में अलग-अलग तरह के ऐपण देकर खुशी जताई जाती है।

यहां के ऐपणों को प्रवासी उत्तराखंडी देश के अलग-अलग कोने में मगांते हैं। पहले से ऐपण लाल मिट्टी (गेरू) और चावल के दाने को पीसकर बनाया जाता था। बदलते समय के साथ अब रंगों से ऐपणों का निर्माण किया जाता है। कुछ घरों में आज भी ऐपण गेरू और चावल के आटे के बनाए जाते हैं।

मुख्यमंत्री द्वारा राजकीय कला घोषित करने के ऐलान के साथ स्थानीय लोगों के साथ संसदीय सचिव मनोज तिवारी ने भी खुशी जताई। मनोज तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री सूबे के सभी स्थानों की संस्कृति के बारे में जानते हैं। एक समय आ गया था कि जब नई पीढ़ी ऐपण को भूल गई थी।

अब मुख्यमंत्री के राजकीय कला घोषित करने के उन कलाकारों में नई उर्जा का संचार हो गया है, जो वर्षों से इस कला को देश-विदेश में प्रसद्धि दिलाने का काम करते हैं। ऐपण कुमाऊं की संस्कृति का एक अहम हिस्सा रहा है और उसकी कलाकृतियों से ही पता चल जाता है कि इस घर में नामकरण है या फिर शादी या पूजा पाठ।