उत्तराखंड के टिहरी जिले में जौनपुर क्षेत्र की संस्कृति अपनी अलग ही पहचान रखती है। मसूरी में टिहरी गढ़वाल के जौनपुर क्षेत्र के मेले और परंपरा आज भी उसी तरह जिंदा हैं, जैसे उनके पूर्वज विरासत मे छोड़ कर गए हैं।

क्षेत्र मे महासू देवता को न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है। जब लोगों के विवादों का निपटारा कोर्ट में नहीं होता है, तब लोग भगवान महासू के दरबार मे अर्जी लगाकर न्याय की गुहार लगाते हैं। जौनपुर के बिरोड़ गांव में साल में एक बार भगवान महासू का मेला आयोजित किया जाता है।

गांव का व्यक्ति कहीं भी हो, लेकिन मेले के लिए एक बार गांव जरूर आता है। भगवान महासू की पूजा के लिए लोग दूर-दूर से बिरोड़ गांव में पहुंचते हैं। पारंपरिक वेशभूषा और लोक गीतों के साथ लोग रात भर भगवान की पूजा करते हैं।
साथ ही भगवान की डोली के साथ नाचते गाते हैं।

इस मेले के लिए लोग साल भर इंतजार करते हैं। गांव की परंपरा है कि जब तक पूर्व मंत्री खजानदास ढोल नहीं बजाएंगे, तब तक भगवान महासू की पूजा शुरू नहीं होती है। वहीं पूर्व मंत्री और बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष खजानदास भी हर साल मेले में ढोल बजाकर अपनी परंपरा को निभा रहे हैं।

खजानदास के ढोल बजाने के बाद ही लोगों पर क्षेत्र के ग्राम देवता अवतरित होते हैं। पू्र्व मंत्री खजानदास कहते हैं कि लोगों को अपनी परंपरा को नहीं भूलना चाहिए। पहाड़ की परंपराओं और लोक संस्कृति का अनोखा संगम जौनपुर के बिरोड़ गांव मे एक साथ देखने को मिलता है। जो लोग अपनी संस्कृति, बोली भाषा के साथ ही अपनी जड़ों से दूर जा रहे हैं। उन लोगों को जौनपुर का बिरोड़ गांव का मेला एक बार आवश्य देखना चाहिए।