उत्तराखंड में डेंगू के डंक का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है और अब मरीजों की संख्या चिंताजनक स्थित तक पहुंच गई है। डेंगू की बीमारी अब मरीजों की जान पर भारी पड़ रही है. सरकार अस्पतालों में बदस्तूर मरीजों की तादाद बढ़ने लगी है। राज्य में 184 डेंगू मरीजों को डेंगू होने की पुष्टि हो चुकी है।

अस्थायी राजधानी देहरादून के दून अस्पताल में डेंगू का आइसोलेटेड वार्ड मरीजों से भर चुका है। अब नए वार्ड बनाने की तैयारी की जा रही है, यहां लगातार नए डेंगू के मरीज भर्ती हो रहे है। इस तरह से देहरादून में डेंगू के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं।

बारिश के मौसम के पहले ही स्वास्थ्य महकमे डेंगू के रोकथाम को लेकर बड़े जोर शोर से तैयार करने का दावा कर रहा था, लेकिन जैसे बारिश के मौसम ने अपनी रफ्तार पर ब्रेक लगाई। डेंगू के मच्छर इधर-उधर पनपने लगे। अस्थायी राजधानी देहरादून के साथ धर्मनगरी हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंहनगर में डेंगू के दस्तक हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

डीजी हेल्थ का कहना है कि राज्य में वायरल के सबसे ज्यादा मरीज देहरादून में देखने को मिल रहे हैं। वायरल के मरीज डेंगू होने से घबरा रहे हैं, जबकि जितने भी मरीज अस्पतालों में आ रहे हैं, सभी का जरूरत के मुताबित मेडिकल टेस्ट कराया जा रहा है। जिससे डेंगू के संदिग्ध मरीजों को भी भर्ती किया जा सके।

उनका कहना है कि इस समय वायरल का सीजन चल रहा है। मौसम में बदलाब आ रहा है। ऐसे में मरीज डेंगू होने आंशका जता रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं है उनका कहना है सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में दवाएं हैं।

मरीजों के लिए अलग से वार्ड भी बनाए गए हैं। फिलहाल सरकार के दावे चाहे जो हो, लेकिन हकीकत यह है कि राज्य में जिस तरह से मरीजों की तादाद बढ़ रही है, उसके चलते स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।

डेंगू के प्रति रहें सचेत, इन बातों का रखें ध्यान

  • बच्चे को बुखार हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
  • बुखार आने पर गीली पट्टी माथे पर लगाएं
  • बच्चे को लगातार तरल पदार्थ देते रहें
  • डॉक्टर की बताई दवाएं ही खिलाएं
  • अपनी मर्जी या सुनी-सुनाई दवाएं न दें
  • बच्चे को पूरी बाजू की कमीज पहनाएं
  • ध्यान रखें कि डेंगू का मच्छर दिन में काटता है

खुद डॉक्टर बनने की कोशिश ना करें
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मरीज को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा नहीं खानी चाहिए। आजकल सोशल साइट्स पर डेंगू से बचने और इलाज के तमाम तरह की दवाइयां बताई जा रही हैं। डॉक्टरों की मानें तो इनकी प्रमाणिकता पर संदेह है। ऐसे में बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसी दवाइयों के प्रयोग से बचें।

डेंगू की आशंका के बीच लोगों में घबराहट भी बढ़ती जा रही है। प्लेट्लेट्स काउंट 70,000 से 80,000 होने पर लोग डॉक्टरों पर प्लेटलेट्स चढ़ाने का दबाव बना रहे हैं, इसके लिए सिफारिश तक करा रहे हैं।

देहरादून अस्पताल के पीएमएस का कहना है कि ऐसे मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ा दी गई तो वास्तविक जरूरत वाले मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक स्वस्थ व्यक्ति में ढाई से तीन लाख प्लेटलेट्स होती हैं। ऐसे में किसी व्यक्ति में 10 हजार से कम प्लेटलेट्स होने पर ही इसे चढ़ाने की ज्यादा जरूरत होती है।

स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टरों की माने तो राज्य में डेंगू फिलहाल नियंत्रण में है और विभाग ने डेंगू की रोकथाम और इलाज के लिए प्रभावी व्यवस्था की है। दून अस्पताल, जौलीग्रांट में संदिग्ध मरीजों का फ्री एलाइजा टेस्ट किया जा रहा है। दून अस्पताल में 16 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। इसके अलावा तमाम बड़े प्राइवेट अस्पतालों में भी अलग वार्ड बनाए गए हैं।

दून अस्पताल के पीएमएस डॉ. आरएस असवाल ने बताया कि ब्लड बैंक में खून की कमी नहीं है। प्लेटलेट्स का भी संकट नहीं है। बताया कि खून से 48 घंटों के भीतर प्लेटलेट्स निकाले जा सकते हैं।

हल्द्वानी में डेंगू से पहली मौत
डेंगू के डंक से गुरुवार रात राज्य में पहली मौत हो गई। बागेश्वर जिले के काफलीगैर निवासी डेंगू पीड़ित राजेंद्र सिंह (37) को बुधवार रात हल्द्वानी के बृजलाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसने गुरुवार रात दम तोड़ दिया।

राजेंद्र सिंह को पिछले दस दिन से बुखार था। वे अल्मोड़ा में अपना इलाज करा रहे थे। स्थिति बिगड़ने पर बुधवार को उन्हें हल्द्वानी लाया गया और बृजलाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बृजलाल हॉस्पिटल में वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. अमरपाल सिंह ने बताया कि राजेंद्र सिंह की स्थिति काफी गंभीर थी। गुरुनार को सिंह की स्थिति बिगड़ गई और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

उन्होंने बताया कि राजेंद्र की मौत की सूचना नैनीताल के सीएमओ डॉ. एलएम उप्रेती को दे दी गई है। उन्होंने कहा कि राजेंद्र सिंह कहीं बाहर भी नहीं गए थे और गांव में ही रह रहे थे। बागेश्वर में डेंगू होना चिंता का विषय है।

इधर, सुशीला तिवारी अस्पताल में डेंगू के 15 मरीज भर्ती हैं। इनमें तीन नए मरीज हैं, जिनमें रुद्रपुर निवासी सरफराज (18), दूधिया नगर रुद्रपुर निवासी गगन (7 माह), हल्द्वानी इंदिरा नगर निवासी शहजिल (8 माह) शामिल हैं। इनमें गगन की हालत गंभीर बनी हुई है।

इसके अलावा हल्द्वानी के निजी अस्पतालों में भी डेंगू के छह नए मरीज भर्ती कराए गए। इनमें एक कृष्णा हास्पिटल, तीन बृजलाल हास्पिटल और दो नीलकंठ हास्पिटल में भर्ती हैं। ऊधमसिंह नगर जिले में गुरुवार को पांच लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई थी।

शुक्रवार को छह और नए मरीज रुद्रपुर और गुलरभोज के अस्पताल में भर्ती कराए गए। उधर, देहरादून में डेंगू के 16 नए मामले सामने आए। इधर, शुक्रवार को डेंगू के पांच मरीज चंद्रा देवी, गणेश दत्त, विशाल, देवेंद्र और पारस को उनकी हालत सुधरने पर सुशीला तिवारी अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।

इस बीच, सुशीला तिवारी अस्पताल में दिमागी बुखार से दो और लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में सुंदर कुमार (33 वर्ष) निवासी आनंद नगर आरटीसी हेमपुर नैनीताल और महक (04 माह) निवासी बिलासपुर जिला रामपुर शामिल हैं। सुंदर कुमार 10 सितंबर को और महक 11 सितंबर को सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती हुई थीं।

एसटीएच के एमएस डॉ. एके पांडेय ने बताया कि महक की मौत गुरुवार देर रात और सुंदर कुमार की मौत शुक्रवार दोपहर लगभग डेढ़ बजे हुई। इससे पहले बुधवार रात मित्रपुरम जवाहर ज्योति दमुवाढूंगा निवासी प्रेमलाल के पुत्र सूरज कुमार (11) की दिमागी बुखार से बृजलाल अस्पताल में मौत हो चुकी है।

इसके साथ ही दिमागी बुखार से मरने वालों की संख्या तीन हो गई है। सुशीला तिवारी अस्पताल में दिमागी बुखार के 12 लोग अभी भी भर्ती हैं। इनमें शुक्रवार को भर्ती हुए सात नए मरीज है। इनमें दो की हालत गंभीर बनी हुई है।

काशीपुर निवासी (11 वर्ष) भारती, हेड़ाखान निवासी कविता (08 वर्ष), हल्द्वानी निवासी अशमा (03 वर्ष), ठाकुर नगर रुद्रपुर निवासी अमनदीप (14 वर्ष), बंगाली कालोनी लालकुआं निवासी बब्ली (08 वर्ष), गदरपुर निवासी अनुज (12 वर्ष), बाजपुर निवासी मुस्तारी (55 वर्ष)।