उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों के गांव अब स्मार्ट होने जा रहे हैं। राज्य सरकार जल्द ही पलायान की रफ्तार को रोकने के लिए पहाड़ के गांवों को ‘स्मार्ट गांव’ बनाने जा रही है। जिसके लिए अधिकारियों को योजना बनाने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं।

राज्य की हरीश रावत सरकार पहाडों पर बसे गांवों को लेकर योजना लाने जा रही है। स्मार्ट गांव नाम की इस योजना को पहाड़ पर गांवों के विकास और रोजगार के संसाधन उपलब्ध कराने के लिए लाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के औद्योगिक सलाहकार रणजीत रावत का कहना है कि इस योजना के तहत शुरुआत में राज्य के बीस गांवों का चयन स्मार्ट गांव के लिए किया जाएगा।

इन गांवों में आवासीय व्यवस्था, उच्च कोटी के स्कूल, अस्पताल और छोटे बाजार जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। गांव से लगातार पलायन कर रहे लोगों को गांव में ही रोकने के लिए यह योजना लाभकारी होगी। क्योंकि योजना के जरिए युवाओं को अपने गांव में ही रोजगार मिलेगा, जिससे उन्हें बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

पलायन को रोकने के मकसद से लाई जा रही स्मार्ट गांव योजना की जानकार सराहना कर रहे हैं। क्योंकि राज्य की सबसे बड़ी दिकक्त खाली हो रहे गांव ही हैं। वरिष्ठ पत्रकार योगेश भट्ट के शब्दों में इस योजना को लाने से पहले सरकार को जमीनी स्तर पर बहुत होमवर्क करने की जरूरत है।

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स्मार्ट गांवों के लिए जिन गांवों का चयन किया जाएगा, वहां मूलभूत सुविधाएं सरकार कैसे मुहैय्या कराएगी, यह सबसे बड़ा सवाल है। क्योंकि राज्य बनने के 15 साल बाद तक पहाडों में रोजगार की स्थिति बेहतर नहीं कही जा सकती है। ऐसे में सरकार को इस योजना का ठोस तरीके से क्रियान्वयन कराना होगा, जिससे योजना का लाभ पहाड़ पर रह रहे लोगों को मिल सके।

स्मार्ट गांव योजना के पीछे सरकार की मंशा भले ही पलायन रोकना हो, लेकिन पहाड़ पर काम करने से कतराने वाले अफसरों के निकम्मेपन के चलते ऐसी योजनाओं का सफल प्रभाव अक्सर धुंधला हो जाता है। ऐसे में सरकार को स्मार्ट गांव योजना की शुरुआत से पहले सभी पहलुओं पर गौर करने की जरूरत है, जिससे पहाड़ के लोगों को पहाड़ की जिंदगी पहाड़ सी मुश्किल ना लगे।