गणेश में गण यानी – वर्ग यानी समूह और ईश अथार्थ स्वामी यानी जो समस्त जीव जगत के स्वामी हैं, वही गणेश हैं। गणानां जीवजातानां यः ईश-स्वामी सः गणेशः। गणेश जी महिमा अपरमपार है शायद यही कारण है कि उनकी गरिमा के लिए रामचरितमानस में स्वयं तुलसीदास जी ने लिखा है – महिमा जासु जान गनराऊ। प्रथम पूजिअत नाम प्रभाऊ। इसीलिए किसी भी कार्य की शुरुआत के समय कहा भी जाता है कि श्रीगणेश करें।

ये शुभ संयोग गणेश के खड़े होने की अवस्था बताती है, हालांकि दुनिया में रहते हुए मनुष्य को सांसारिक कर्म भी करने जरूरी हैं। वस्तुतः इन सबमें एक संतुलन बनाए रखते हुए उसे अपने सभी अनुभवों को परे रखते हुए अपनी आत्मा से भी जुड़ाव रखना चाहिए और आध्यात्मिक होना चाहिए।

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गणपति के पैरों में प्रसाद धन शक्ति का प्रतीक है। इसका अर्थ है कि जो अपना जीवन सत्य की राह पर जीते हैं उन्हें संसार पुरस्कार जरूर देता है।

इस साल गुरुवार 17 सितंबर को गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है। 17 में 1 और 7 का योग 8 होता है। अंक ज्योतिष के अनुसार 8 का अंक मंगल को अभिव्यक्त करता है। मंगल शुभ-लाभ, पराक्रम, मेहनत, परिश्रम और सफलता का प्रतीक है। इसकी बुध के साथ मित्रता है, जिसके स्वामी गणपति हैं।

इसी प्रकार यह 15वां साल है। इसके 1 और 5 अंक का योग 6 आता है। 6 का स्वामी बुध है। साल और तारीख के अंक बताते हैं कि ये दोनों शुभ फल देने वाले और अनुकूल वातावरण का निर्माण करने वाले हैं। इसलिए कहा जाना चाहिए कि गणेश चतुर्थी शुभ-लाभ और समृद्धि लेकर आई है।

स्वाति नक्षत्र में गणेश चतुर्थी, धन-संपत्ति का सुख मिलेगा
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अगर आप कर्ज के बोझ से दबे हैं। आमदनी के नए स्रोत खोज रहे हैं। कारोबार में घाटा सह रहे हैं। नौकरी में लंबे समय से प्रमोशन रुका हुआ है या फिर आपके पास कोई रोज़गार ही नहीं है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसी सारी समस्याओं का समाधान गुरुवार को गणेश जी के आने के बाद हो जाएगा। क्योंकि गुरुवार को स्वाति नक्षत्र में पड़ने वाली गणेश चतुर्थी को धन संपत्ति के लिहाज के काफी विशेष माना जा रहा है।

स्वाति नक्षत्र में गणपति बप्पा की पूजा से लक्ष्मी तो आएंगी ही, भक्तों की हर मनोकामना भी पूरी होगी। स्वाति नक्षत्र की गणेश चतुर्थी लक्ष्मी कारक योग बनाती है। गुरुवार का दिन ज्ञान और बुद्धि के लिए विशेष है। 17 सितंबर को गुरुवार भी है इसलिए इस बार गणपति बप्पा छात्रों को परीक्षा में भी भारी सफलता दिला सकते हैं। हो भी क्यों न, गणपति ऋद्धि-सिद्धि और विद्या-बुद्धि के देवता जो हैं।

गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त
धन-संपत्ति और विद्या-बुद्धि पाने के लिए गणेश चतुर्थी को गणपति बप्पा की स्थापना शुभ मुहूर्त में ही करें। इस बार चतुर्थी तिथि 16 सितम्बर को रात 08:01 PM से लग गई, जो कि 17 सितंबर रात 10:20 PM तक रहेगी।

चतुर्थी तिथि प्रारम्भ -16 सितम्बर 08:01 PM

चतुर्थी तिथि समाप्त -17 सितम्बर 10:20 PM

इन दो समयों के बीच गणपति की घर-घर में स्थापना होगी। वैसे गणपति के घर में प्रवेश करने और गणेश पूजा का समय-11:20 AM से 01:45 PM रहेगा। 17 सितंबर को दिन और रात का चौघड़िया मुहूर्त भी गणपति की पूजा और मंत्र जाप के किसी भी अनुष्ठान के लिए श्रेष्ठ माना जा रहा है। दिन और रात का चौघड़िया इस प्रकार है-

17 सितंबर दिन का चौघड़िया
06:30 AM से 08:01 AM शुभ
11:02 AM से 12:33 PM चर
12:33 PM से 2:04 PM लाभ
2:04 PM से 3:35 PM अमृत
05:05 PM से 6:36 PM शुभ

17 सितंबर रात का चौघड़िया
06:36 PM से 08:05 PM अमृत
08:05 PM से 09:35 PM चर
12:33 PM से 2:02 PM लाभ

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ऐसे तो साल भर में शुक्ल और कृष्ण पक्ष को मिलाकर कुल 24 चतुर्थी पड़ती है लेकिन भाद्रपद मास की चतुर्थी का विशेष महत्व है। इस दिन किए गए स्नान, दान, जप और तप से गणपति की सौ गुणा कृपा मिलती है। लेकिन इस दिन चंद्रमा का दर्शन नहीं किया जाता। कहते हैं कि जो इस दिन चंद्रमा का दर्शन करता है उस पर झूठा कलंक या ग़लत आरोप लगते हैं। 16 और 17 सितंबर को आप चंद्र दर्शन न करें।

16 सितंबर को चंद्र दर्शन निषेध – 20:01 PM से 20:39 PM
17 सितंबर को चंद्र दर्शन निषेध – 09:29 AM से 9:19 PM

17 सितंबर को सूर्य की मिथुन संक्रांति

17 सितंबर को ही सूर्य का कन्या राशि में दोपहर 12:20 PM मिनट पर प्रवेश हो रहा है। सूर्य की कन्या संक्रांति के दौरान जप-तप और स्नान दान का बहुत पुण्य मिलता है। सूर्य की कन्या संक्रांति का पुण्य और महापुण्यकाल इस प्रकार है-

सूर्य की कन्या संक्रांति पुण्यकाल-12:20 PM से शाम 6:36 PM तक
संक्रांति का समय-12:20 PM
महापुण्य काल-12:20 PM से 12:53 PM तक