खिलाड़ियों के साथ ऐसे धोखे की दास्तान आपने आज तक नहीं सुनी होगी

करीब एक साल पहले 28 सितंबर 2014 को मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री के हाथों कई खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि के चेक बंटवाए गए थे। पर्यटन दिवस के मौके पर रन फॉर ह्यूमैनिटी का आयोजन एक निजी संस्था की ओर से किया गया था।

दौड़ के बाद किसी को पच्चीस हजार, किसी को पंद्रह हजार तो किसी को दस हजार रुपये के डमी चेक दिए गए, लेकिन सालभर बाद भी न तो असली चेक मिल पाए हैं और न ही आयोजकों की ओर से कोई भरोसा। अब खिलाड़ी मायूस हैं।

अंतरराष्ट्रीय एथलीट प्रीतम बिंद कहते हैं कि कोई रिजवी जी थे, जिन्होंने ये आयोजन कराया था। पर्यटन दिवस के मौके पर ये आयोजन कराया गया था। जानकारी दी गई थी कि पर्यटन विभाग भी इसमें सहयोगी है। 28 सितंबर की शाम को ही बीजापुर गेस्ट हाउस में सीएम के हाथों विजेताओं को पुरस्कार राशि के चेक बंटवाए गए। इस दौरान पर्यटन मंत्री भी मौजूद थे।

खिलाड़ियों के साथ धोखे और फरेब की ये कहानी पढ़कर किसी को भी गुस्सा आना लाजिमी सी बात है। करीब एक साल पहले मिले ये डमी चेक खिलाड़ियों के लिए कूड़ा साबित हो रहे हैं। घर के कोने में पड़े हैं और खराब हो रहे हैं।

दरअसल रन फॉर ह्यूमैनिटी का आयोजन एक इवेंट कंपनी की ओर से आयोजित कराया गया था। पर्यटन विभाग ने भी इसमें सहयोग किया था। चेक बांटे जाने के दौरान पर्यटन मंत्री की मौजूदगी भी इस बात को जाहिर कर रही है। इसी साल जनवरी महीने में पर्यटन विभाग ने बकायदा दो लाख रुपये की धनराशि भी आयोजकों को जारी कर दी है।

सूत्र के अनुसार कई और संस्थानों से भी इस आयोजन के लिए आर्थिक मदद ली गई, लेकिन खिलाड़ियों को सिर्फ धोखा ही हाथ लगा। खिलाड़ियों का हौसला चकनाचूर हो गया और हाथ लगी सिर्फ मायूसी।

अब मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार सुरेंद्र कुमार अग्रवाल इस मामले में कड़ी कार्रवाई की बात कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि मामला बेहद गंभीर है और खिलाड़ियों के साथ धोखा बर्दास्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल आयोजकों की ओर से खिलाड़ियों को कोई आश्वासन नहीं दिया जा रहा है।