कल यानी गुरुवार से भगवान सूर्य नारायण सिंह राशि छोड़कर कन्या राशि में चले जाएंगे। इसी दिन वर्षा ऋतु भी समाप्त हो जाएगी और शरद ऋतु का प्रारंभ होगा। सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश करते ही ग्रह नक्षत्रों की चाल भी बदल जाती है।

सूर्य भगवान एक महीना पहले जब सिंहस्थ हुए थे, तब नासिक कुंभ प्रारंभ हुआ था। यह अनोखा संयोग है कि नासिक कुंभ के लिए गुरु और सूर्य दोनों को ही सिंहस्थ होना पड़ता है। गुरु फिलहाल सिंह राशि में रहेंगे, लेकिन ऋतु बदलने के लिए भगवान सूर्य नारायण कन्यागत हो जाएंगे।

इस बार कन्या राशि में प्रवेश करने के दिन स्वाति नक्षत्र पड़ रहा है। चंद्रमा तुला राशि के रहेगा। शरद ऋतु के लिए ऐसा योग शुभ माना जाता है। सूर्य के कन्या राशि में जाने के बाद श्राद्ध पक्ष प्रारंभ होता है। दक्षिणायन रहते हुए सूर्य जब कन्या राशि में आते हैं तब दक्षिण दिशा में निवास करने वाले पितृ प्रसन्न होते हैं।

पितरों के साथ-साथ देवों के लिए भी यह दिन शुभ माने गए हैं। यूं तो सभी देवी-देवता भगवान विष्णु के साथ इस समय पाताल में हैं किंतु भगवती और श्रीराम के जन्मोत्सव इसी काल में पड़ेंगे। नौ दिनों के नवरात्र के साथ-साथ भगवान गणेश की स्मृति में होने वाले देशव्यापी महोत्सव 17 सितंबर से शुरू हो जाएंगे।