अब अपने पहाड़ों में लगेंगे उद्योग-धंधे, नहीं झेलना पड़ेगा पलायन का दर्द

उत्तराखंड सरकार ने उद्योगों को पहाड़ी क्षेत्रों में स्थापित करने के लिए कवायद तेज कर दी है। इसके लिए राज्य सरकार ने उद्यमियों से उनकी समस्याएं जानने के वास्ते गहन विचार-विमर्श हेतु विशेष सत्र आयोजित करने शुरू किए हैं।

सरकार की तरफ से मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने सोमवार शाम उद्योगों खास तौर से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) के साथ गहन विचार-विमर्श की शुरुआत करते हुए उद्योगों से जानना चाहा कि उन्हें पहाड़ पर उद्योग लगाने में किस प्रकार की परेशानियां आ रही हैं।

इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (आइएयू) से जुड़े उद्यमियों के साथ विचारों को साझा करते हुए मुख्य सचिव शर्मा ने उन्हें बताया कि मुख्यमंत्री हरीश रावत चाहते हैं कि मैदानों की तरह पहाड़ में भी उद्योग लगें, जिससे क्षेत्र का विकास होने के साथ ही रोजगार के अवसर भी सृजित हों और पलायन की रफ्तार रुके।

हाल में एमएसएमई नीति के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक कार्ययोजना तैयार करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा था कि नीति का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाना चाहिए, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इसका भरपूर लाभ उठा सकें।

इस नीति के तहत रावत ने राज्य के सभी 13 जिलों में नई इकाइयों की स्थापना में मदद के लिए विशेष केंद्र खोले जाने की भी जरूरत बतायी थी। नयी एमएसएमई नीति के तहत राज्य सरकार उद्यमियों को कई प्रकार के प्रोत्साहन दे रही है। यह नीति 31 मार्च, 2020 तक लागू रहेगी।

हांलांकि, इसके तहत लिए गए प्रोत्साहनों का लाभ दस साल की अवधि या 31 मार्च, 2025, जो भी पहले हो, तक लिया जा सकेगा। नई नीति में उद्यमियों को पूंजी सहायता, ब्याज सहायता, वैट में छूट तथा बिजली सब्सिडी और जमीन की खरीद पर स्टांप डयूटी में छूट जैसे प्रोत्साहन देने की घोषणा की गई है।

सरकार की गंभीरता इस बात से पता चलती है कि इस बार उद्योग प्रतिनिधियों के साथ गहन विचार विमर्श में मुख्य सचिव ने विभिन्न विभागों के दस सचिवों को भी बैठक में बुलाया था, जिससे उद्यमियों में विश्वास पैदा किया जाए और मौके पर ही उनकी समस्याओं का निस्तारण किया जा सके।

इस संबंध में शर्मा ने उद्यमियों से पूछा कि सरकार द्वारा नई एमएसएमई नीति के तहत ढेर सारे प्रोत्साहन दिए जाने के बावजूद उद्योग अपने कारखाने पहाड़ों पर लगाने में क्यों हिचक रहे हैं।

इस सत्र में मुख्य सचिव ने नौगांव में लगाए गए आधुनिकतम डच तकनीक पर आधारित विशेष नियंत्रित वातावरण भंडारण सुविधा का उदाहरण दिया, जिसमें सेबों को तोड़े जाने के बाद आठ-नौ महीने तक ताजा सुरक्षित रखा जा सकता है।

मुख्य सचिव ने इस विशेष सुविधा के संचालक श्री जगदंबा समिति के प्रमुख लक्ष्मी प्रकाश सेमवाल तथा अपने स्थानीय उत्पादों के लिए बाजार स्थापित करने वाली अल्मोडा की मुक्ति दत्ता की प्रशंसा करते हुए कहा कि नौगांव की महिलाओं द्वारा सेबों से ताजा जूस बनाकर दिल्ली जैसे शहरों में बेचा जा रहा है, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है और साथ ही क्षेत्र की आर्थिकी भी सुधर रही है।

बैठक में कई उद्यमियों ने इस बात का भी जिक्र किया कि सरकार की तरफ से दी जा रही सब्सिडी उन्हें नहीं मिल पा रही है। हांलांकि, वहां मौजूद प्रमुख सचिव पर्यटन उमाकांत पंवार ने उन्हें विश्वास दिलाया कि सब्सिडी को मिलने में लगने वाले दो-तीन साल के समय को कम किया जाएगा और वह अब जल्दी मिलने लगेगी।

कुछ उद्यमियों ने सरकार का ध्यान इस ओर भी दिलाया कि पहाड़ पर ऐसे कई स्थान हैं जहां बिजली की किल्लत है। इस पर मुख्य सचिव ने कहा कि अगर भविष्य में बिजली की कमी वाले स्थान पर उद्यम लगाने का कोई प्रस्ताव आता है तो सरकार वहां 24 घंटे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।