मुख्यमंत्री से वादा करने के बाद मुकरी नर्सें, अब भी हड़ताल पर अड़ी

उत्तराखंड सरकार की ओर से अधिकांश मांगें माने जाने के बाद भी नर्सें अपनी हड़ताल पर अड़ी हुई हैं। नर्सें अब भी हड़ताल खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित तमाम उच्च अधिकारियों के साथ नर्सों की वार्ता में हड़ताल खत्म करने पर बात बन गई थी, लेकिन शाम को जब बैठक का ब्योरा मिला तो नर्सें मुकर गईं।

हाईकोर्ट के हड़ताल खत्म करवाने के आदेश के बाद नर्सों का यह कदम सरकार के लिए चौंकाने वाला है। ग्रेड-पे वृद्धि को छोड़कर उनकी अधिकांश मांगें सरकार ने मान ली हैं, लेकिन नर्सें पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में अब सरकार उन पर कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

बीजापुर राज्य अतिथिगृह में शनिवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी, मुख्य सचिव राकेश शर्मा, प्रमुख सचिव चिकित्सा व स्वास्थ्य ओमप्रकाश, सचिव चिकित्सा व स्वास्थ्य भूपेंद्र कौर औलख, सचिव चिकित्सा शिक्षा आरके सुधांशु, सचिव वित्त अमित नेगी, आरसी जोशी, महानिदेशक हेल्थ डॉ. आरपी भट्ट और नर्सिंग सर्विसेज एसोसिएशन की अध्यक्ष अंजना भौमिक व अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नर्सिंग संवर्ग के ढांचे को सुदृढ़ किया जाए। नर्सिंग संवर्ग के लिए अलग निदेशालय सहित पदोन्नति पद को अपर निदेशक तक किए जाने पर सहमति बनी। नर्सिंग कर्मियों की पदोन्नति के लिए सेवा नियमावली में संशोधन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने आग्रह किया कि नर्सिंग एसोसिएशन काम पर लौट आए। इसके बाद नर्सिंग एसोसिएशन ने हड़ताल वापस लेने का ऐलान कर सीएम को धन्यवाद तक दिया, लेकिन शाम को बैठक का कार्यवृत जारी हुआ तो नर्सों ने हड़ताल जारी रखने का ऐलान कर दिया जो हाईकोर्ट की अवमानना के दायरे में आता है।

ग्रेड पे पर बात बनती न देख अब नर्सों की मांग है कि उनके संवर्ग से रिटायर होने वाली नर्स को संवर्ग का उच्चतम स्केल मिले। इसके लिए नर्सें एश्योरड कैरियर प्रोग्रेशन (एसीपी) में पांच पदोन्नतियां अनिवार्य करने मांग कर रही हैं। यानी हर नर्स अपर निदेशक पद से रिटायर होगी। इससे अन्य सभी संवर्ग यह मांग करेंगे जिससे सरकार को हजारों करोड़ के बजट की जरूरत पड़ेगी।

ग्रेड-पे वृद्धि संभव नहीं
नर्सों की मुख्य मांग ग्रेड-पे वृद्धि पर सरकार ने साफ किया कि राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए संभव नहीं है। पीजी करने वाली नर्सों को केंद्र की तर्ज पर भत्ता दिया जाने पर भी स्थिति साफ नहीं हुई है। सीएम हरीश रावत ने कहा कि यदि ऐसा किया जाता है तो अंतर कैडर संघर्ष की स्थिति हो जाएगी। सातवें वेतन आयोग के आने पर एक बार फिर नर्सिंग संघ के साथ विचार-विमर्श कर लिया जाएगा।