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बीजापुर हाउस में शनिवार को नर्सिंग सर्विसेज एसोसिएशन के पदाधिकारियों, सरकार और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई। मुख्यमंत्री हरीश रावत भी इस बैठक में मौजूद रहे। बैठक में नर्सिंग संघ की मांगों पर विस्तार से विचार विमर्श किया गया।

बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नर्सिंग संवर्ग के ढांचे को सुदृढ़ किया जाए। तय किया गया कि नर्सिंग संवर्ग का अगल से निदेशालय स्थापित किया जाएगा। इसमें अपर निदेशक, संयुक्त निदेशक, उपनिदेशक के पद नर्सिंग के लिए सृजित किए जाएंगे।

नर्सिंग कर्मियों को पदोन्नति के अवसर मिल सकें, इसके लिए जरूरी होने पर सेवा शर्तों में शिथिलता दी जाएगी। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि नर्सिंग का व्यवसाय बहुत ही पवित्र है और नर्सिंग कर्मियों के लिए सम्मानजनक सेवा शर्तों का प्रावधान करने के लिए सरकार तैयार है, लेकिन ग्रेड-पे उच्चीकृत किए जाने की मांग को माना जाना राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार के लिए संभव नहीं है।

अगर ऐसा किया जाता है तो अंतर कैडर संघर्ष की स्थिति हो जाएगी। सातवें वेतन आयोग के आने पर एक बार फिर से नर्सिंग संघ के साथ विचार विमर्श कर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अपील की कि जनता को हो रही परेशानी को देखते हुए नर्सिंग एसोसियेशन काम पर लौट आएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर वो तुरंत काम पर वापस आ जाते हैं तो किसी तरह की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस पर नर्सिंग संघ के पदाधिकारियों ने अपनी सहमति जताते हुए हड़ताल को तत्काल प्रभाव से वापस लेने के प्रति आश्वस्त किया।