राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी को मिला तोहफा, छात्रों की निकल पड़ी

राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने 6 विषयों में पीजी के लिए पांच सालों की स्थायी मान्यता प्रदान कर दी है।

पिछले दिनों मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागों के निरीक्षण के बाद एमसीआई ने एमडी और एमएस की 17 सीटों को स्थायी मान्यता दे दी है। एमसीआई ने जनरल सर्जरी और गाइनी की चार-चार, जनरल मेडिसिन की तीन और ईएनटी, पीडिया और ऑफ्थोमोलॉजी की दो-दो सीटों पर स्थायी मान्यता दी है। वहीं कम्यूनिटी मेडिसिन और एनाटॉमी में दो-दो सीटों और पैथोलॉजी में एक सीट को पहले से ही स्थायी मान्यता मिली हुई है।

ज्ञात हो कि मेडिकल कॉलेज में साल 2011 में एमडी और एमएस की पढ़ाई शुरू होने के बाद 39 सीटों पर पीजी शुरू करने की अस्थायी मान्यता मिली थी, लेकिन बाद में मेडिकल कॉलेज में स्टॉफ और संसाधनों की कमी को देखते हुए एमसीआई ने स्थायी मान्यता रोक दी थी। इससे यहां से एमडी व एमएस की पढ़ाई पूरी करने वाले डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा था और उन्होंने कोर्ट की भी शरण ली थी।

प्राचार्य डॉ. सीएमएस रावत के मुताबिक अब केवल एनेस्थीसिया विभाग में एमसीआई की विजिट होनी है, जिसके लिए भी तैयारी पूरी कर ली गई है। वहीं अन्य विभागों के लिए इस साल एमडी और एमएस के छात्र परीक्षा देंगे, जिसके बाद एमसीआई की टीम मेडिकल कॉलेज का दौरा करेगी।

प्राचार्य ने बताया कि पीजी छात्रों के लिए पांच साल के बांड की बाध्यता के चलते पीजी कोर्स शुरू होने से लेकर अब तक मेडिकल कॉलेज में एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और बायोकेमेस्ट्री की सीटें खाली हैं। उन्होंने इन विषयों की पीजी सीटों पर एडमिशन के लिए सरकार से नियमों में ढील देने का अनुरोध किया है।