उत्तराखंड में नर्सों की हड़ताल को लेकर सरकार का रुख और सख्त हो गया है। एस्मा लगाने के एक दिन बाद ही सरकार ने ‘नो वर्क नो पे’ भी लागू करने का फरमान जारी कर दिया। यह आदेश गुरुवार से प्रभावी हो गया है। इसके अलावा वैकल्पिक व्यवस्था पर भी शासन ने होमवर्क शुरू कर दिया है। बावजूद इसके नर्सें हड़ताल पर अडिग हैं।

स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी के आश्वासन के बावजूद नर्सेज एसोसिएशन ने आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ओमप्रकाश ने बताया कि इन हड़तालियों से सख्ती से निबटा जाएगा। हड़ताल पर रहने वाली नर्सों को वेतन नहीं मिलेगा। उनके स्थान पर रिटायर्ड नर्सों को संविदा के आधार पर नियुक्त किया जाएगा।

शुक्रवार को रिटायर्ड नर्सों के लिए वॉक इन इंटरव्यू की अनुमति दे दी जाएगी। इस मामले की फाइल तैयार हो गई है। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग की पढ़ाई करने वालों को नियुक्ति देने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाएगी। सेना के अस्पतालों से रिटायर्ड नर्सों के लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था में विकल्प रखा गया है। इससे अलग सेना की हेल्थ ब्रांच का भी सहयोग लिया जाएगा, इसके लिए बातचीत का दौर जारी है।

प्रमुख सचिव ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को उन प्राइवेट अस्पतालों में रेफर करने का भी निर्णय लिया गया है, जिनके साथ सरकार का टाई-अप है। उधर, गुरुवार शाम विधानसभा में नर्सों के प्रतिनिधिमंडल की स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी से वार्ता हुई।

नर्सेज एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता लक्ष्मी पुनेठा ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर विचार के लिए मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को निर्देशित किया गया है, लेकिन नर्सें इतने पर मानने को तैयार नहीं हैं। नर्सें तब तक हड़ताल वापस नहीं लेंगी, जब तक ग्रेड बढ़ाने के लिए लिखित में आदेश जारी नहीं हो जाते।