…ये आरोप लगाए थे अंग्रेजों ने शहीद-ए-आजम भगत सिंह पर, कोर्ट की कॉपी उत्तराखंड में

शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह पर लाहौर कोर्ट में चले लाहौर षड़यंत्र केस की सत्यापित प्रतिलिपि पाकिस्तान से भारत लाई गई है। आपके लिए खुशी की बात ये है कि यह कॉपी हमारे अपने उत्तराखंड में मौजूद है। साल 2009 में हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय ने केस की कार्यवाही की सत्यापित प्रतिलिपि को पाकिस्तान से हासिल किया था।

अब जब फिर से पाकिस्तान की लाहौर हाईकोर्ट में सरदार भगत सिंह की फांसी के मामले को दोबारा खोलने के लिए आवेदन किया गया है तो इस प्रतिलिपि की महत्ता और भी बढ़ गई है। पाकिस्तान के भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन ने लाहौर हाईकोर्ट में आवेदन कर इस केस को फिर से खोलने की गुहार लगाई है। शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव सहित 18 लोगों पर पांच मई 1930 को लाहौर कोर्ट में ट्रायल शुरू हुआ था।

11 सितंबर 1930 को कोर्ट ने इन पर आरोप तय किए। मुकदमा शुरू होने से आरोप तय होने तक की कार्यवाही 1659 पेजों में दर्ज है। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की ओर से 18 अगस्त 2009 को लाहौर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई और शहीद भगत सिंह पर चले कोर्ट ट्रायल की सत्यापित प्रतिलिपि देने का अनुरोध किया गया था।

लाहौर हाईकोर्ट में 25 अगस्त 2009 को याचिका पर सुनवाई हुई थी। लाहौर हाईकोर्ट ने प्रतिलिपि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय को दिए जाने फैसला सुनाया था, इसके बाद 31 अगस्त 2009 को सत्यापित प्रतिलिपि विश्वविद्यालय को भेज दी गई। इसके हर पेज पर लाहौर हाईकोर्ट की मुहर लगी है।

भगत सिंह पर लगाई गई थी ये धाराएं
302 : हत्या का आरोप
120 : आपराधिक षडयंत्र रचना
121 : सरकार के खिलाफ युद्ध का षडयंत्र
109 : किसी अपराध के लिए उकसाना।