उत्तराखंड को राज्यगीत मिलने के लिए अभी और इंताजर करना पड़ेगा। राज्यगीत चयन समिति को संस्कृति विभाग में आई 203 प्रविष्टियों में से एक भी राज्यगीत के लायक मुफीद नहीं लगी। हालांकि 15 ऐसी प्रविष्टियों को जरूर चुन लिया गया है, जिन्हें संशोधन के बाद राज्यगीत के लिए तैयार कराया जा सकता है।

मंगलवार को संस्कृति निदेशालय में राज्यगीत चयन समिति के अध्यक्ष प्रो. लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’ ने प्रेस वार्ता में बताया कि राज्यगीत के लिए देशभर से 203 प्रविष्टियां मिली। सोमवार और मंगलवार को चयन समिति की बैठक में इन प्रविष्टियों में से एक परफेक्ट गीत नहीं मिला।

कहा कि सभी में कुछ ना कुछ कमियां हैं। इसके बावजूद समिति ने 15 ऐसी प्रविष्टियां चुनी हैं, जिन्हें संशोधन के बाद सुधारा जा सकता है। बताया कि इन सबको राज्यगीत में विज्ञापन की शर्त के अनुसार लेखन को कहा जाएगा।

समिति के सह-अध्यक्ष नरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि साहित्यकारों को संतुष्ट करना आसान काम नहीं है। यही वजह है इनमें से एक भी प्रविष्टि पूरी तरह से पसंद नहीं आई है। जो चुने गए हैं, उनमें भी काफी संशोधन की गुंजाइश है।

हालांकि इन 15 लेखकों में वो क्षमता है, जो अपने गीतों को सुधार सकते हैं। बैठक में चयन समिति के अध्यक्ष और सह-अध्यक्ष के साथ सदस्य हीरा सिंह राणा, डॉ. अतुल शर्मा, जिया नटरोही, जहूर आलम, नीता कुकरेती, रतन सिंह जौनसारी, अंबर खरबंदा ने मिलकर फैसला लिया।

राज्यगीत के लिए कुछ प्रमुख शर्ते ये हैं
हिंदी भाषा से शुरू होकर राज्य की क्षेत्रीय भाषाओं में करेगा प्रवेश
राज्यगीत का आकार स्थायी तथा अंतरा सहित 16 से 20 पंक्तियों से अधिक नहीं होना चाहिए
समिति को गीत की कुछ पंक्तियों का संपादन एवं उनका क्षेत्रीय बोलियों में अनुवाद करने का अधिकार होगा।