‘विशेष दर्जा नहीं रहेगा’, अब खुद ही संसाधन जुटाने होंगे : मुख्यमंत्री रावत

देहरादून।… उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा है कि विकास की आवश्यकताओं, राज्य के प्रति केंद्र सरकार के दृष्टिकोण में आए परिवर्तन तथा आने वाले समय में सातवें वेतन आयोग से पड़ने वाले संभावित व्यय भार के मद्देनजर राज्य में संसाधन जुटाने को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए उसे नीति का स्थायी अंग बनाना होगा।

एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, सोमवार शाम देहरादून में आयोजित पॉलिसी प्लानिंग ग्रुप की दूसरी बैठक में रावत ने कहा कि अब यह लगभग निश्चित हो चुका है कि मध्य हिमालयी राज्यों – उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश का विशेष राज्य का दर्जा नहीं रहेगा और केंद्रीय सहायता भी 90:10 के अनुपात में नहीं रहेगी।

बहरहाल, औपचारिक रूप से केंद्र से इस संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है। इसलिए किसी भी तरह की नीति निर्माण में इस तथ्य को ध्यान रखना होगा।

इस संबंध में मुख्यमंत्री ने यह भी ध्यान दिलाया कि 14 वें वित्त आयोग की सिफारिशों से उत्तराखण्ड व तमिलनाडु को नुकसान हुआ है। इसे केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा स्वीकार भी किया गया है। ऐसे में संसाधन जुटाने को राज्य की नीति का स्थाई अंग बनाना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्माण के बाद सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) बढ़ा है लेकिन इसे भी रोजगार से जोड़ना होगा और खास तौर पर 15 से 35 आयु वर्ग व 35 से 50 वर्ष के आयु वर्ग की मानव शक्ति पर ध्यान देना होगा।

पॉलिसी प्लानिंग ग्रुप के संयोजक आईके पांडे ने राज्य निर्माण के बाद राज्य की अर्थव्यवस्था में आए बदलावों पर प्रस्तुतिकरण देते हुए कृषि, वन सहित प्राथमिक, विनिर्माण व सेवा क्षेत्र के लिए अलग रणनीति बनाए जाने की आवश्यकता जताई।