विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान दें शिक्षक : राज्यपाल

देहरादून।… उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पॉल ने अधिकांश अभिभावकों के नौकरीपेशा होने के कारण शिक्षकों की भूमिका को अधिक महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षक स्कूलों में ऐसा वातावरण बनाया जिससे विद्यार्थी भारत की गौरवशाली सभ्यता और संस्कृति की विरासत को आत्मसात कर उनको जीवित रख सकें।

राजभवन में आयोजित एक समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले राज्य के 26 शिक्षकों को पहले गवर्नर्स टीचर्स अवॉर्ड से पुरस्कृत करने के बाद राज्यपाल ने कहा कि आज अधिकांश अभिभावक नौकरी पेशा होने के कारण बच्चों को समय नहीं दे पाते हैं। ऐसे में शिक्षकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। स्कूलों में वे ऐसा वातावरण सृजित करें कि विद्यार्थी भारत की गौरवशाली सभ्यता, संस्कृति और मूल्यों की विरासत को आत्मसात कर उन्हें जीवित रख सकें।

उन्होंने शिक्षकों को राष्ट्रनिर्माण के लिए विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान देने का भी आग्रह किया और कहा कि मूल्य विहीन शिक्षा निरर्थक है। राज्यपाल ने युवाओं को देश का भविष्य बताया और कहा कि इन युवाओं का भविष्य शिक्षकों के हाथ में है जिनका मार्गदर्शन और ज्ञान का आलोक युवाओं को एक बेहतर इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करता है।

उन्होंने कहा कि सूचना तकनीक के आधुनिक युग में शिक्षकों को अपनी भूमिका मार्गदर्शक के रूप में केंद्रित करनी होगी और विद्यार्थियों को नई रचनात्मक सोच व विचारों के लिए प्रेरित करना होगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि ये अवॉर्ड दूरदराज के शिक्षकों-विद्यार्थियों में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन लाएंगे।

इस वर्ष बोर्ड परीक्षा के श्रेष्ठ परिणामों के आधार पर गवर्नर्स टीचर्स अवॉर्ड से पुरस्कृत प्रत्येक शिक्षक को 10 हजार रुपये की नकद धनराशि, एक प्रशस्ति पत्र और महान शिक्षाविद डॉ. एस राधाकृष्णन की तीन पुस्तकों का एक सेट प्रदान किया गया।