उत्तराखंड में साल 2017 में होने वाले विधानसभा चुनावों में भले ही अब भी डेढ़ साल से ज्यादा का वक्त बचा हो, लेकिन क्षेत्रीय दलों ने अभी से ही तैयारी शुरू कर दी है। राज्य गठन के बाद से अबतक बीजेपी और कांग्रेस ही राज्य की सत्ता पर काबिज रहीं हैं, लेकिन अब तीसरे विकल्प के रूप में उभरने के लिए कई पार्टियों ने जद्दोजहद शुरू कर दी है।

इनमें आपसी खींचतान की शिकार हुई उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी), अपना जनाधार तलाशती सपा और हाल ही में तेजी से उभरी आम आदमी पार्टी (AAP) सबसे ऊपर है। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव अभी दूर की कौड़ी भले हों, लेकिन क्षेत्रीय दलों ने एक बार फिर तीसरे मोर्च के रूप में उभरने के लिए कमर कसनी शुरू कर दी है।

उनकी तैयारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विधानसभा स्तर पर यूकेडी, सपा और आप जैसी पार्टियां जहां संगठन को मजबूत करने का काम कर रही हैं, वहीं लंबे समय बाद इन पार्टियों के कार्यकर्ता भी दिखाई देना शुरू हो गए हैं।

आपसी कलह की शिकार यूकेडी भी विधानसभावार कार्यकर्ताओं में फिर से जोश भरने की तैयारी कर रही है, तो दिल्ली की सत्ता पर कब्जा जमाने के बाद आप के कार्यकर्ता भी खासा उत्साहित नजर आ रहे हैं और तो और पार्टी के नेताओं के भी दौरों में तेजी आई है।

यूकेडी जहां एकजुटता का दावा कर रही है, तो वहीं आम आदमी पार्टी अभी पत्ते पूरी तरह से खोलती नजर नहीं आ रही। राज्य गठन के 15 साल तक बीजेपी और कांग्रेस का ही विधानसभा पर कब्जा रहा है। ऐसे में इन दोनों दलों को भले ही ये पार्टियां ज्यादा नुकसान न पहुंचा पाए, लेकिन तीसरे विकल्प के लिए सभी जोर आजमाइश में हैं।

हाल ही में पड़ोसी राज्य यूपी के सीएम अखिलेश यादव की पत्नी और सांसद डिंपल यादव के उत्तराखंड कनेक्शन को लेकर सपा भी इस बार खासी चर्चा में हैं। पहाड़ न सही, पर मैदानों में इस बार सपाई ज्यादा उत्साहित नजर आ रहे हैं।

विधानसभा चुनावों के पहले क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की ये अंगड़ाई भले ही बीजेपी और कांग्रेस जैसे दिग्गज दलों पर कोई ज्यादा प्रभाव न डाल पाएं, लेकिन क्षेत्रीय दलों की इस जद्दोजहद से इतना तो साफ है कि भविष्य में होने वाले विधानसभा चुनाव इस बार खासा दिलचस्प होंगे।