शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले
वतन पर मरने वालों का यही बाक़ी निशां होगा
कभी वह दिन भी आएगा जब अपना राज देखेंगे
जब अपनी ही ज़मीं होगी और अपना आसमां होगा