भारत में शनिवार को बड़े ही उत्साह से शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है, जिसको दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल भी अपने ही अंदाज में सेलीब्रेट करता हुआ दिखाई दे रहा है। गूगल ने अपने गूडल को बच्चों के कलर करने के अंदाज में रंगा हुआ है। साथ ही गणित और विज्ञान के साथ-साथ पूरी दुनिया का ज्ञान देने वाले शिक्षकों के महत्व को कई चित्रों के माध्यम से बखूबी प्रदर्शित किया गया है। गूगल का शिक्षकों के प्रति ये सम्मान वाकई भावात्मक नज़र आ रहा है।

भारत में हमेशा से गुरुजनों (शिक्षकों) को सम्मान देने की परंपरा रही है। यहां विद्यार्थी दिल से गुरुजनों का सम्मान करते हैं और उनसे जीवनभर शिक्षा ग्रहण करते रहते हैं। हमारे देश में गुरुजनों को देवताओं के समान समझा गया है। तभी तो संस्कृत के एक श्लोक में लिखा गया है- ‘गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।’ मतलब गुरु ही ब्रह्मदेव हैं, गुरु ही भगवान विष्णु हैं और गुरु ही भगवान शिव हैं।

कबीरदास जी ने अपने एक दोहे में गुरू के मार्गदर्शन की प्रशंसा करते हुए लिखा है- ‘गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पांय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।’ मतलब गुरु और ईश्वर के एक साथ सामने हो जाने पर असमंजस की स्थिति ये बन जाती है कि पहले किसके चरण स्पर्श किए जाएं। ऐसे में दोहे में कहा है कि गुरु ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग बताता है, इसलिए पहले गुरु का ही चरण-स्पर्श करना बेहतर है।

भारत में 5 सितंबर को स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति रहे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के अवसर पर देश के सभी शिक्षकों के सम्मान में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। हालांकि यूनेस्को ने 5 अक्टूबर को अंरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस घोषित किया है। यूनेस्को ने साल 1994 से शिक्षकों के प्रति सहयोग को बढ़ावा देने और भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शिक्षकों के महत्व के प्रति जागरूकता लाने के मकसद से 5 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस घोषित किया है।