देहरादून जिले के चंद्रबंदनी निवासी राइफलमैन शिशिर मल्ल का पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह देहरादून पहुंच गया। देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहूति देने वाले शिशिर का पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह उनके पैतृक आवास पर लाया गया। शुक्रवार को ही शिशिर का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

शहीद का पार्थिक शरीर देख घर में लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। शिशिर के परिजन उनके शव से लिपटकर बिलख उठे हैं। शिशिर की मां रेणु व पत्नी संगीता का रो-रोकर बुरा हाल है।

सुरक्षाबलों ने बुधवार को राफियाबाद में नौ घंटे चली भीषण मुठभेड़ में आतंकी संगठन लश्कर-ए-इस्लाम के आतंकी को मार गिराया था। इस मुठभेड़ में 32 राष्ट्रीय राइफल्स के देहरादून निवासी शिशिर मल्ल शहीद हो गए। शिशिर का परिवार यहां चंद्रबनी में रहता है। शिशिर की शिक्षा-दीक्षा राजा राममोहन राय अकेडमी से हुई।

शिशिर के पिता सूबेदार मेजर स्व. सुरेश मल्ल के ही नक्श-ए-कदम पर चलते हुए वह साल 2005 में फौज में भर्ती हुए। उसी 3/9 जीआर का हिस्सा बने जिससे पिता सेवानिवृत्त हुए थे। दस साल की सेवा में अपने साहस और जज्बे से शिशिर ने एक अलग मुकाम हासिल किया। अब देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देकर वह सदा-सदा के लिए अमर हो गए हैं।

शहीद शिशिर के घर ढांढस बंधाने वालों का तांता लगा हुआ है। सहसपुर विधायक सहदेव पुंडीर, पूर्व ब्लाक प्रमुख विपिन कुमार समेत कई लोगों ने परिवार को सांत्वना दी।

उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल ने शहीद हुए शिशिर मल्ल के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की है। राज्यपाल ने कहा वीरभूमि उत्तराखंड के जवान देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान करते रहे हैं। जिस पर पूरे देश को गर्व है। उन्होंने शहीद के परिजनों को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से कामना की है।