आईएएस अकादमी में फर्जी तरीके से घुसने और वहां कई महीने गुजारने वाली रूबी चौधरी लगता है खुद के बनाए जाल में फंस गई है। रूबी ने अकादमी और यहां के कई अफसरों व कर्मचारियों पर जो आरोप लगाए थे, वे अब हवा-हवाई साबित हो रहे हैं।

पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने सोमवार को जांच की समीक्षा कर कुछ निर्देश दिए। उम्मीद की जा रही है कि एक-दो दिन में पुलिस आरोप पत्र भी दाखिल कर सकती है। एलबीएस राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में रूबी चौधरी के फर्जी आईएएस के रूप में ट्रेनिंग लेने के मामले की जांच के बाद हवा निकल गई।

रूबी छह महीने तक अकादमी में बतौर प्रशिक्षु आईएएस के रूप में रही। मार्च में जब यह मामला पकड़ में आया तो रूबी को बिना कार्रवाई के वहां से निकाल दिया गया। 31 मार्च को जाकर मसूरी कोतवाली में एलबीएस अकादमी की तरफ से रूबी के खिलाफ जालसाजी का मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस जांच के बाद एसआईटी का गठन किया गया।

रूबी चौधरी ने गिरफ्तारी के बाद अकादमी के वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। दो केंद्रीय मंत्रियों के नाम जुड़ने के कारण यह मामला और भी संगीन हो गया। एसआईटी ने व्यापक स्तर पर जांच पड़ताल के साथ बयान दर्ज किए।

अकादमी के डिप्टी डायरेक्टर के अलावा उनके पीए, डायरेक्टर के पीए, डिप्टी डायरेक्टर फोटोग्राफर निधि शर्मा, दो प्रशिक्षु आईएएस और आईटीबीपी के जवानों व सुरक्षाकर्मियों के बयान दर्ज किए गए। रूबी से भी कई दौर में पूछताछ हुई। रिमांड पर अकादमी की किताबों के अलावा दूसरे तरह के रिकॉर्ड कब्जे में लिए गए।

एसआईटी की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। एक-दो दिन में पुलिस आरोप पत्र दाखिल कर सकती है। सूत्रों का कहना है कि पूरे मामले में रूबी चौधरी के खिलाफ अकाट्य सबूत मिले हैं, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में उसकी परेशानी बढ़ेगी। जांचकर्ताओं ने माना है कि रूबी ने अधिकतर बातें मनगढंत कही हैं।

हेंड राइटिंग की रिपोर्ट में डिप्टी डायरेक्टर पर लगाया गया आरोप निराधार रहा। सूत्रों का कहना है कि जांच में एक तरह से अकादमी को क्लीन चिट मिलने वाली है। अकादमी के स्टाफ को सिर्फ सुरक्षा में लापरवाही का जिम्मेदार माना गया है। ऐसे लोगों की संख्या 6 और 7 के बीच हो सकती है।

एलबीएस अकादमी के गंभीर मामले की जांच पूरी करने में एसआईटी को 153 दिन लग गए। पहले दिन यह जांच इंस्पेक्टर के सुपुर्द की गई, लेकिन अगले दिन उन्हें हटाकर दूसरे इंस्पेक्टर को दे दी गई। शाम तक जांच सीओ मसूरी द्वारा किए जाने के आदेश हो गए। अगले दिन डीजीपी ने एएसपी शाहजहां अंसारी की अगुवाई में एसआईटी गठित कर दी।

जांच के अंतिम चरण में पहुंचते ही अंसारी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। बाद में एएसपी ममता बोरा को यह जांच स्थानांतरित हुई। इसी बीच डीजीपी बीएस सिद्धू ने जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति कर दी। सरकार द्वारा सीबीआई जांच को नकार दिए जाने के बाद जांच आईपीएस सदानंद दाते के नेतृत्व में गठित एसआईटी को दी गई। अब जाकर यह जांच पूरी हुई है।