गीता ज्ञान, मानस रामायण और वेद-पुराण अब आपके स्मार्टफोन में

आकाशवाणी ने रामचरित मानस का डिजिटल संस्करण तैयार कर मानस प्रेमियों को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों बड़ा एक तोहफा दिलवाया है। ऐसे ही कुछ तोहफे आइआइटी धार्मिक ग्रंथों को डिजिटल स्वरूप देकर अगले कुछ सालों में सौंप सकता है।

मोबाइल स्क्रीन पर 11 भारतीय भाषाओं में गीतासार का अध्ययन तो कर ही सकते हैं, रामचरित मानस व बाल्मीकि रामायण को भी मूलरूप से पढ़ सकते हैं। कुछ और प्राचीन ग्रंथों के डिजिटलीकरण का काम जारी है। आइआइटी, कानपुर के कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में प्रोफेसर टी.वी. प्रभाकरण कई सालों से संस्कृत, हिंदी, नेपाली धार्मिक ग्रंथों को डिजिटल स्वरूप देने का काम कर रहे हैं।

कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के प्रिंसिपल इंजीनियर बीएम शुक्ला ने संस्कृत ग्रंथों को बहुआयामी रूप से डिजिटल रूप दिया है। इस माध्यम से आइआइटी देश-विदेश की कई भाषाओं में भारतीय संस्कृति की शब्द संपदा को पूरी दुनिया में पहुंचा रहा है। प्रोफेसर प्रभाकरन व उनकी टीम ने गीता सुपर साइट तैयार की जिसमें गीता अपने मूल स्वरूप में तो मौजूद है ही उसे तेलुगु, गुरुमुखी, तमिल, असमिया, बांग्ला, गुजराती, कन्नड़, ओड़िया, मलयालम व रोमन अंग्रेजी में भी पढ़ा जा सकता है। साइट पर गीता को सुना भी जा सकता है।

प्रो. प्रभाकरण ने भानुभट्ट की नेपाली रामायण को मूलरूप से डिजिटल करने के साथ ब्रासूत्र, योग सूत्र, अष्टावक्र गीता, अवधूत गीता, कपिल गीता, श्रुति गीता, श्रीराम गीता, उद्धव गीता व विभीषण गीता को भी मूल रूप से शामिल किया है।