राष्ट्रीय संगठनों के आह्वान पर बुधवार को उत्तराखंड के तमाम सरकारी बैंक में काम नहीं हो रहा है। इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में बीमा कर्मचारी भी शामिल हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस एक दिवसीय हड़ताल के कारण दो हजार करोड़ रुपये से ऊपर का कारोबार प्रभावित हो सकता है। कुछ निजी बैंक इस हड़ताल में शामिल नहीं हैं।

उधर परिवहन, ऑटो और स्कूल वैन एसोसिएशन के चक्काजाम के कारण अस्थायी राजधानी देहरादून के अलावा हल्द्वानी, नैनीताल, रामनगर, कोटद्वार, हरिद्वार, ऋषिकेश सहित तमाम छोटे-बड़े शहर में चक्का जाम का असर दिश रहा है। कुछ स्कूलों ने तो पहले ही बुधवार की छुट्टी घोषित की हुई है।

ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन सहित पांच संगठनों के आह्वान पर उत्तराखंड में बुधवार को बैंकों की हड़ताल रहेगी। हड़ताल की वजह से सभी सरकारी राष्ट्रीयकृत बैंक, प्रादेशिक बैंक, कुछ निजी बैंक, बीमा कंपनियों के सभी कर्मचारी काम नहीं कर रहे हैं। दूसरी ओर, परिवहन, ऑटो, विक्रम, स्कूल वैन का चक्काजाम होने की वजह से मंगलवार देर शाम तक ज्यादातर स्कूलों ने छुट्टी घोषित कर दी थी।

transport-strike

हड़ताल पर जाने वाले उत्तराखंड के सभी राष्ट्रीय, प्रादेशिक और निजी बैंकों में हर दिन दो हजार करोड़ रुपये से ऊपर का कारोबार होता है। हड़ताल की वजह से आरटीजीएस, सिक्कों का लेनदेन, चेक क्लियरेंस, कैश का लेनदेन सहित सभी बैंकिंग कार्य बंद हैं। एक ब्रांच का प्रतिदिन का करोड़ों रुपये का लेनदेन होता है। यह सभी काम बुधवार को अटक गए हैं।

कुछ ऐसी है हड़ताल की शक्ल-ओ-सूरत
उत्तराखंड में करीब 6 हजार सरकारी राष्ट्रीयकृत बैंक कर्मचारी हैं।
राज्य में अर्बन कोऑपरेटिव बैंक, फेडरल बैंक, नैनीताल बैंक के भी एक हजार कर्मचारी हैं।
बीमा कर्मचारी (एलआईसी, जनरल इंश्योरेंस की चारों कंपनियां) में 700 कर्मचारी हैं।

इन बैंकों में हो रहा है काम
आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक, एक्सेस बैंक, इंडसइंड बैंक आदि।

बैंक कर्मचारियों की मांगों पर एक नजर

  • कामगार विरोधी श्रम सुधार रोके जाएं।
  • जनविरोधी बैंकिंग सुधार रोके जाएं।
  • कॉरपोरेट घरानों पर भारी एनपीए को सख्ती से लागू किया जाए।
  • जानबूझ कर ऋण वापस न करना फौजदारी अपराध घोषित किया जाए।
  • बैंकों में आउटसोर्सिंग रोकी जाए।
  • पेमेंट बैंकों को लाइसेंस देना बंद किया जाए और पेमेंट बैंकों के लाइसेंस रद्द किए जाएं।
  • निजी संस्थान के लोगों की सरकारी बैंकों में नियुक्तियां रोकी जाएं।