सिर्फ 20 रुपये में चार रोटी, चावल, दाल-सब्जी, चटनी और आचार। महंगाई के इस दौर में इस पर यकीन करना भले ही मुश्किल हो, लेकिन उत्तराखंड सरकार ने स्वतंत्रता दिवस से सभी के लिए ये सुविधा शुरू कर दी है।

अस्थायी राजधानी देहरादून में घंटाघर के करीब एमडीडीए कांप्लेक्स में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ‘इंदिरा अम्मा’ भोजन याजना का उद्घाटन किया। अस्थायी राजधानी इस योजना के शुभारंभ के मौके पर खुद मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी रेणुका रावत ने गरीबों में भोजन परोसा।

इसके साथ ही लोगों को इस कैंटीन में 20 रुपये की इंदिरा अम्मा थाली मिलने लगेगी। मुख्यमंत्री ने खुद भी 20 रुपये की थाली खरीदी और यहां भोजन किया। हालांकि, इस कैंटीन में थाली की पैकिंग की कोई सुविधा नहीं होगी।

राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को मूर्त रूप देने के लिए पिछले कई दिनों से एमडीडीए कॉम्प्लेक्स में कैंटीन को पूरी तरह से सुसज्जित करने के लिए दिन-रात काम चल रहा था।

इंद्रामा कैंटीन की खास बातें :

  • इंदिरा अम्मा थाली कोई भी व्यक्ति ले सकता है।
  • कैंटीन में बैठकर ही थाली का आनंद ले सकते हैं, पैकिंग की सुविधा नहीं।
  • कैंटीन के बायीं तरफ गाड़ियों के लिए पार्किंग की सुविधा है। यहां 45 मिनट के लिए वाहन निशुल्क पार्क कर सकते हैं।
  • शुरुआत में कैंटीन सुबह नौ से शाम चार बजे तक खुली रहेगी।
  • कैंटीन में 24 लोगों को कुर्सी-मेज और 16 लोगों को स्टेंडिंग में एक साथ इंदिरा अम्मा थाली परोसी जा सकेगी।
  • कैंटीन के संचालन की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को दी गई है।
  • फिलहाल दुकान के किराए, एलपीजी गैस के इस्तेमाल, उस पर सब्सिडी आदि के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है।

जल्द ही सरकारी दफ्तरों की कैंटीन महिलाएं चलाती नजर आएंगी। कैंटीन में तवा रोटी, चटनी, अचार के अलावा विभिन्न स्थानीय व्यंजनों का स्वाद भी मिल सकेगा। दून के सरस मार्केटिंग सेंटर की कैंटीन से इसकी शुरुआत होनी है। इसे ‘मॉडल कैंटीन’ के रूप में लिया जाएगा।

उत्तराखंड सरकार की स्थानीय खाद्य उत्पादों को बढ़ावा देने की योजना से विभिन्न सरकारी विभागों की कैंटीनों को भी जोड़ा जा रहा है। योजना के तहत इन कैंटीनों का जिम्मा राज्य की महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजीएस) को दिया जाना है।

दून के विकास भवन में स्थित सरस मार्केटिंग सेंटर की कैंटीन के लिए अधिकारियों ने एसएचजीएस की महिला लीडरों से बात भी कर ली है। स्वतंत्रता दिवस के बाद कैंटीन को एसएचजीएस के सुपुर्द करने की औपचारिकता पूरी कर ली जाएगी।

कैंटीन में रूटीन में रोटी, चावल, सब्जी, चाय आदि चीजें तो मिलेंगी, साथ ही रोटेशन में मंडुवे की रोटी, झंगोरे की खीर जैसे स्थानीय व्यंजन भी बनाए जाएंगे। एसएचजीएस द्वारा निर्मित अचार, चटनी, मुरब्बा आदि का स्वाद भी मिल पाएगा। बाद में इसे दूसरे विभागों की कैंटीन में शुरू किया जाएगा।