अंशू गुप्ता को प्रतिष्ठित मैग्सेसे अवॉर्ड-2015 के लिए चुना गया है। अंशू गुप्ता का उत्तराखंड से भी गहरा संबंध रहा है। उन्होंने साल 1985 में बनबसा के शारदा इंटर कॉलेज से हाईस्कूल की पढ़ाई थी। हाईस्कूल में प्रथम श्रेणी में पास हुए अंशू गुप्ता के पिता स्व. एसडी गुप्ता यहां सैनिक छावनी में एमईएस में अधिकारी थे।

एशिया का ‘नोबेल पुरस्कार’ कहे जाने वाले मैग्सेसे अवॉर्ड के लिए अंशू गुप्ता के चुने जाने पर उनके प्रिंसिपल, टीचर और मित्र खासे गदगद हैं। हाईस्कूल के बाद 11वीं की पढ़ाई टनकपुर स्थित राधेहरि राजकीय इंटर कॉलेज में की। इसके बाद उनके पिता का देहरादून ट्रांस्फर हो गया था।

उन्होंने साल 1983 से 1986 तक का समय यहां बिताया था। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त पूर्व प्रिंसिपल बंशीधर उपाध्याय बताते हैं कि अंशू मेधावी, होनहार और योग्य छात्र था और उसकी हैंड राइटिंग भी काफी अच्छी थी। कुशल मंच संचालक और डिबेटर छात्र की इस उपलब्धि ने स्कूल का भी मान बढ़ाया है।

anshu-gupta-goonj

इसी तरह अंशू गुप्ता के छोटे भाई आशू गुप्ता के साथ पढ़े और अंशू से एक कक्षा जूनियर देवभूमि बीएड कॉलेज के निदेशक कैलाश थपलियाल बताते हैं कि पढ़ाई में मेधावी होने के साथ अन्य गतिविधियों में भी उन्हें महारथ हासिल थी।

जनसेवा का भाव उनमें स्कूल के समय से ही नजर आता था। सौम्य और गंभीर स्वभाव के धनी अंशु अपने शिक्षकों और दोस्तो के हमेशा प्रिय रहे। शारदा इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल करन सिंह कहते हैं कि मैग्सेसे अवॉर्ड के लिए अंशू के चुने जाने से शारदा इंटर कॉलेज का भी नाम रोशन हुआ है।

मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले अंशू गुप्ता ने पढ़ाई के बाद कॉरपोरेट जगत में बड़ी नौकरियां करने के बाद समाजसेवा को चुना। गूंज फाउंडेशन नाम से बनाई संस्था ने लोगों से पुराने कपड़े लेकर जरूरतमंदों में बांटने का कार्य किया। वे लंबे समय से आपदा पीड़ितों के तन ढकने का जरिया बने हुए हैं।