कहते हैं कि वो घर घर नहीं होता, जहां बच्‍चे नहीं होते। लेकिन बच्‍चे हों और वे माता-पिता के लिए तनाव का कारण बन जाएं तो माता-पिता के लिए इससे दुखद कुछ भी नहीं हो सकता। एकल परिवारों के दौर में यह समस्‍या बेहद आम है, जहां बच्‍चे कभी एकाकीपन के शिकार हो जाते हैं तो कभी आधुनिकता की अंधी दौड में भटक जाते हैं।

आप भी अगर ऐसी समस्‍या से जूझ रहे हैं, तो इस मामले में फेंग्‍शुई आपकी मदद कर सकता है। आशय यह कि फेंग्‍शुई के ये उपाय अमल में लाएं तो बच्‍चों से आपके संबंध बहुत हद तक संवर सकते हैं।

  • बच्चों के साथ संबंध मधुर रखने के लिए माता-पिता को अपनी निजी शुभ दिशा की ओर मुख करके सोना चाहिए। अपनी निजी शुभ दिशा आप अपनी जन्‍मतिथि के द्वारा जान सकते हैं। इस मामले में फैंग्‍शुई विशेषज्ञ भी आपकी मदद कर सकते हैं।
  • आपके भवन के मुख्य द्वार के सामने नकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाली कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। अगर ऐसा है तो इसका निदान फेंग्‍शुई गैजेट के माध्यम से तुरंत करना चाहिए।
  • कई बार ऐसा भी देखने में आता है कि भवन का पश्चिमी कोना कटा हुआ होता है। ऐसी स्थिति में पूर्व दिशा की दीवार पर शीशा लगाना चाहिए अथवा इस दिशा को अधिक प्रकाशवान रखना चाहिए।
  • सोते समय आपका व बच्चों का सिर शौचालय की तरफ नहीं होना चाहिए। शौचालय की तरफ सिर करके सोना दुर्भाग्य को आमंत्रित करता है। वहीं इससे बच्चों का ध्यान पढ़ाई से हट जाता है।
  • अगर आपका बच्‍चा सुस्‍त है या अक्‍सर बीमार रहता है तो उसका कमरा दक्षिण-पूर्व में बनाएं। यह दिशा अग्नि देव की है, जो आपके बच्‍चे को न सिर्फ ऊर्जा से भरपूर रखेगा बल्कि उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने में भी कारगर होगा।
  • लेकिन ध्‍यान रखें कि अगर बच्‍चा फुर्तिला या शरारती स्‍वभाव का है तो उसका कमरा दक्षिण-पूर्व में न बनाएं।
  • अगर बच्‍चे का कक्ष दक्षिण-पश्चिम में बना है तो वह मनमानी करने लगता है और माता-पिता के कहे अनुसार न चलकर निरंकुश हो जाता है।
  • बच्‍चे भगवान का रूप माने जाते हैं। बाल्‍यावस्‍था में या कहें दस साल तक की आयु के बच्‍चों का कमरा ईशान कोण यानी उत्‍तर-पूर्व में भी बनाया जा सकता है।
  • समझदारी भरा निर्णय यह हो सकता है कि अगर हम बच्‍चों के कमरे के रंगों और फर्निशिंग आदि का चयन बच्‍चे की जन्‍म-तिथि के अनुसार करें। बच्‍चे के आसपास के वातावरण में उन तत्‍वों की कमी पूरी करना उनके व्‍यक्त्तिव विकास व माता-पिता के साथ संबधों में सहायता कर सकता है, जिनकी कमी उनकी जन्‍म तिथि दर्शाती है। इस कार्य में एक कुशल फेंग्‍शुई विशेषज्ञ हमारी सहायता कर सकता है।
  • एक उपयोगी मशवरा यह है कि स्‍टेशनरी का सामान जैसे पैन, पेंसिल, नोट बुक आदि उपहार में न लें। ये सारी वस्‍तुएं विद्या की देवी मां सरस्‍वती का प्रतिनिधित्‍व करती हैं। यदि कोई इन वस्‍तुओं को उपहार दे रहा है और वापस करना संभव नहीं है तो बदले में एक रुपये का सिक्‍का अवश्‍य दें।
  • घर में लगी तस्‍वीरों के मामले में भी हमें सचेत रहना चाहिए। कोई ऐसी तस्‍वीर या शोपीस न लगाएं, जिससे बच्‍चे में खौफ पैदा हो। इसके स्‍थान पर फेंग्‍शुई गैजेट्स को स्‍थापित करें। हो सके तो घर के उत्‍तर, उत्‍तर-पूर्व या पूर्व में परिवार की फोटो लगाएं। यह परिवार के सदस्‍यों में आपसी प्रेम को विकसित करता है।

यह लेख मशहुर वास्तु और फेंग्शुई  विशेषज्ञ नरेश सिंगल से बातचीत के आधार पर लिखा गया है। वास्तु से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या के समाधान के लिए नरेश सिंगल से संपर्क करें…

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