पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को गुरुवार को उनके गृहनगर रामेश्वरम में पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू और वीके सिंह के अलावा कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी डॉ. कलाम की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए पहुंचे।

इस दौरान कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया भी वहां मौजूद रहे। पूर्व राष्ट्रपति को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने से पहले नमाज अदा की गई और सलामी भी दी गई। कलाम को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उमड़ आए। यहां तिरंगा लहराते हुए भी देखा गया और कलाम की शान में नारे भी लगे।

सेहत खऱाब होने के कारण तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता डॉ. कलाम की अंतिम यात्रा में शामिल नहीं हो पाईं। इससे पहले राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि जयललिता की जगह उनकी ओर से इस दौरान 7 मंत्री मौजूद रहेंगे।

रामेश्वरम की धरती पर डॉक्टर कलाम का पार्थिव शरीर पहुंचते ही उनकी अंतिम झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग आंखों में आंसू लिए कतारों में खड़े देखे गए। नई दिल्ली से जब पूर्व राष्ट्रपति का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया तो लोगों के चेहरों पर लोकप्रिय और अति-सम्मानजनक राष्ट्रपति के इस संसार से चले जाने की तकलीफ साफ देखी जा सकती थी।

‘जनता के राष्ट्रपति’ कहे जाने वाले कलाम के पार्थिव शरीर को लोगों के अंतिम दर्शनों के लिए उनके गृहनगर न्यू बस स्टैंड के पास लाया गया और इस दौरान मंडपम से रामेश्वरम तक काफी दूरी तक दोनों ओर लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए खड़े थे। पार्थिव शरीर के पहुंचने के बाद अफरातफरी की स्थिति बन गई और लोग हेलीकॉप्टर की ओर जाने की कोशिश करते देखे गए। हालांकि जल्द ही हालात को काबू में कर लिया गया।

‘मिसाइल मैन’ और ‘जनता के राष्ट्रपति’ के रूप में लोकप्रिय हुए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम का सोमवार शाम आईआईएम शिलांग में एक व्याख्यान देने के दौरान दिल का दौरा पड़ने के बाद निधन हो गया था। डॉ. कलाम को शाम करीब साढ़े छह बजे व्याख्यान के दौरान गिरने के बाद नाजुक हालत में बेथनी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया और उसके दो घंटे से अधिक समय बाद उनके निधन की पुष्टि की गई। डॉ. कलाम अक्टूबर में 84 साल के होने वाले थे।

देश के सर्वाधिक लोकप्रिय राष्ट्रपति माने जाने वाले कलाम ने 18 जुलाई 2002 को देश के 11वें राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला, लेकिन राष्ट्रपति पद पर दूसरे कार्यकाल के लिए उनके नाम पर सर्वसम्मति नहीं बन पायी। वह राजनीतिक गलियारों से बाहर के राष्ट्रपति थे।